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चिदंबरम की विपक्ष को चुनौती
बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए वित्तीय तथा मौद्रिक उपायों का आश्वासन देते हुए वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने आम बजट को सांप्रदायिक ठहराए जाने के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और उसे चुनौती दी कि ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम जैसी सरकार की अहम योजनाओं के विरोध पर वे चुनाव जीत कर दिखाएँ।

वर्ष 2008-09 के आम बजट पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए चिदंबरम ने कहा कि कच्चे तेल, पाम आइल, गेहूँ, एल्यूमीनियम, ताँबा, इस्पात सहित आवश्यक वस्तुओं के अंतरराष्ट्रीय दाम बेतहाशा बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर वस्तुओं की माँग हमें आयात के जरिये पूरी करनी पड़ रही है।

चिदंबरम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दाम बढ़ने के कारण मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में काफी कठिनाई आ रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने के लिए वित्तीय तथा मौद्रिक उपाय किये जा रहे हैं।

वित्तमंत्री के जवाब के बाद सदन ने लेखानुदान के साथ ही वर्ष 2007-08 के लिए अनुदान की अनुपूरक माँगों को मंजूरी देकर और इससे जुड़े विनियोग विधेयक को लोकसभा को लौटा दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

बजट को सांप्रदायिक बताने के भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि समाज में जिस तरह सवर्ण और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्गों के बीच में भारी अंतर है
वैसे ही कुछ अल्पसंख्यक वर्गों में भी बहुजनों की तुलना में शिक्षा तथा अन्य मामलों में काफी अंतर है।

उन्होंने कहा कि अगर इस अंतर को दूर करने तथा अल्पसंख्यकों को शिक्षा के मामले में आगे लाने के लिए सरकार बजट में कुछ विशेष प्रावधान करती है तो उस पर सांप्रदायिक होने का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

चिदंबरम ने कहा कि भाजपा ने इसका विरोध करके अपने पूर्वाग्रह को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है। यह छात्रवृत्ति इस आधार पर नहीं दी जाती कि वह हिंदू,
सिख या मुसलमान हैं।

वित्तमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, किसान ऋण माफी योजना जैसी सरकार की प्रमुख योजनाओं पर विपक्ष को चुनौती दी कि वह इनके विरोध में चुनाव जीतकर दिखाए। बजट चर्चा के दौरान इस मुद्दे को उठाने वाले भाजपा के अरुण शौरी का नाम लेकर चिदंबरम ने कहा कि इन योजनाओं को धोखाधड़ी बताने वाले लोग इसके विरोध में चुनाव जीत कर दिखाएँ।

किसान ऋण माफी के बारे में उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए पूरी तरह बजट से धन मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्ष में बजट से 60 हजार करोड़ रुपए मुहैया करा दिए जाएँगे।

उन्होंने कहा कि मौजूदा संप्रग सरकार के कार्यकाल में इस राशि का दो तिहाई प्रतिशत चुका दिया जाएगा तथा अगली सरकार के लिए मौजूदा विकास दर को देखते हुए शेष राशि बजट से चुकाने में अधिक दिक्कत नहीं आएगी।
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