भारत ने संकेत दिया है कि सरबजीतसिंह को फाँसी पर लटकाना मुद्दे को सुलझाने का सर्वोत्तम तरीका नहीं है और इसके साथ ही सरकार ने वाणिज्य दूतावास को सरबजीत से संपर्क करने की अनुमति देने का निवेदन किया है।
इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के सूत्रों ने बताया कि इस बाबत एक निवेदन पाकिस्तानी अधिकारियों के पास भेजा गया है। सबरजीत को एक अप्रैल को फाँसी पर लटकाया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों को ऐसे संकेत दिए गए हैं कि सरबजीत को फाँसी पर लटकाना हालात से निपटने का सबसे बढ़िया तरीका नहीं हो सकता।
लाहौर स्थित कोट लखपत जेल के अधीक्षक जावेद लतीफ समेत आला अधिकारियों ने कल कहा था कि उन्हें सरबजीत के लिए डेथ वारंट मिला है। सरबजीत पिछले 17 वर्षों से पाकिस्तानी जेल में बंद है और उसे एक अप्रैल को फाँसी दे दी जाएगी।
सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हामिद ने कल कहा था कि सरबजीत को बचाने के लिए कोई कानूनी विकल्प नहीं छोड़ा गया है। हामिद ने कहा कि सरबजीत को केवल तभी बचाया जा सकता है जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ उसे क्षमादान दे दें। इसके लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच असाधारण तालमेल होना जरूरी है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारतीय अधिकारी अपने पाकिस्तानी सहयोगियों के साथ मिलकर सरबजीत को सजा से बचाने और मामले को सुलझाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को अंतिम बार वर्ष 2005 में सरबजीत से मिलने की अनुमति दी गई थी।
सरबजीतसिंह को वर्ष 1991 में लाहौर और मुल्तान में हुए धमाकों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान का कहना है कि सरबजीत जासूस है लेकिन सरबजीत के परिवार वाले पाकिस्तान के इस आरोप का खंडन करते रहे हैं।
इससे पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारतीय नागरिक सरबजीतसिंह की दया याचिका हर पहलू से विचार करने के बाद खारिज कर दी थी।
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