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महिलाओं के लिए नया निकाहनामा
महिलाओं के हक में महिलाओं की कोशिश
आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को एक नया शरई निकाहनामा जारी किया जिसमें शादियों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाते हुए महिलाओं को अनेक अतिरिक्त अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। यह निकाहनामा शिया और सुन्नी दोनों वर्ग की महिलाओं के लिए लागू होगा।

बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में बोर्ड के शरई निकाहनामे का विमोचन करते हुए दावा किया कि यह निकाहनामा शरीयत और हदीश की रोशनी में तैयार किया गया है और पहले से मौजूद निकाहनामों से कई मामलों मे बेहतर है।

अंबर ने बताया कि निकाहनामा उर्दू और हिन्दी में सरल भाषा मे लिखा गया है और इसके हर प्रावधान के साथ पवित्र कुरान की सम्बद्ध आयतों का उल्लेख किया गया है ताकि इसकी प्रामाणिकता पर सवाल न उठाए जा सकें।

दूल्हा-दुल्हन अपने अधिकार और कर्तव्य को भली-भाँति समझ लें। अंबर ने दावा किया कि नए निकाहनामे की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई कि महिलाओं को तलाकशुदा ‍जिंदगी जीने की परेशानियों से बचाया जा सके।

उन्होंने बताया कि शरई निकाहनामे में तीन फार्म रहेंगे जिनमें से एक एक मैरेज रजिस्ट्रार के कार्यालय मे जमा किया जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित पक्ष अदालत की शरण में जा सके जबकि दूसरा फार्म शादी या निकाह कराने वाले काजी के पास रहेगा और तीसरा दूल्हा-दुल्हन के पास।

अंबर ने बताया कि गैर पढ़े-लिखे मुसलमानों में शरीयत की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण मुस्लिम महिलाओं के साथ ज्यादा समस्याएँ खड़ी हुई हैं।

उन्होंने मुसलमानों की शीर्ष संस्था आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पहले से मौजूद निकाहनामे को पुरुषों के पक्ष मे झुका हुआ करार देते हुए कहा कि उसमें न तो पते के सत्यापन का प्रावधान है और न ही निकाह के पंजीकरण का।

उन्होंने बताया कि आज जारी निकाहनामे मे मियाँ-बीबी के पते के सत्यापन के साथ ही फोटो लगे शपथ-पत्र का भी प्रावधान किया गया है ताकि इस आधार पर आगे चलकर कोई शौहर अपनी बीवी से पीछा छुड़ाने की नाजायज कोशिश न कर सके।

अंबर ने कहा कि पुराने निकाहनामे मे औरतों के अधिकार पूरी स्पष्टता से नहीं बताए गए हैं साथ ही निकाहनामे की भाषा इतनी कठिन है कि उसे आसानी से समझा नहीं जा सकता।

इस बीच आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने महिला पर्सनल लॉ बोर्ड के आज जारी शरई निकाहनामे को यह कहते हुए अप्रासंगिक और अनावश्यक करार दिया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का निकाहनामा पहले से मौजूद है और वह पूरी तरह शरीयत और कुरान की हिदायतों के अनुरूप है।
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