किडनी रैकेट के सरगना डॉक्टर अमित ने हरियाणा पुलिस के सामने खुलासा किया है कि भारत आकर मौत के शिकार हुए तीनों तुर्क नागरिक किडनी प्रत्यारोपण के लिए ही उसके पास आए थे।
फरीदाबाद पुलिस के रिमांड में डॉ. अमित ने कई और खुलासे भी किए हैं जिनके बारे में पुलिस फिलहाल कुछ भी कहने से बच रही है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि डॉक्टर अमित ने यह तो स्वीकार कर लिया है कि तीनों तुर्क नागरिक किडनी बदलवाने ही आए थे, लेकिन उसने इस बात से इनकार कर दिया कि तीनों की मौत किडनी प्रत्यारोपण के दौरान हुई।
पुलिस पूछताछ में अमित ने कहा कि तुर्की से आए नागरिक मधुमेह और दिल की बीमारी के मरीज थे, जिससे उनकी मौत किडनी बदले जाने से पहले ही हो गई।
सूत्रों ने कहा कि अमित ने कई और खुलासे किए हैं जिनकी सत्यता के बारे में अभी पता किया जा रहा है। अमित के खुलासों की सत्यता जाँचने के लिए फरीदाबाद पुलिस गुड़गाँव पुलिस की भी मदद ले रही है। उल्लेखनीय है कि दो अक्टूबर 2003 को तुर्क नागरिक मेहमत बेजीत, 13 नवंबर, 2003 को इशमत गेर और 15 अक्टूबर, 2005 को तुर्क नागरिक यालेदिराम की मौत हो गई थी।
सूत्रों का कहना है कि इन लोगों की मौत डॉ. अमित के गुड़गाँव स्थित अस्पताल में हुई, लेकिन उसने शवों को अपने साथी डॉ. उपेंद्र के बल्लभगढ़ स्थित श्रीराम अस्पताल पहुँचा दिया और मृत्यु प्रमाण-पत्र भी बल्लभगढ़ से ही बने।
सूत्रों के अनुसार अमित ने ऐसा इसलिए किया ताकि जाँच की नौबत आने पर मामले को जटिल बनाया जा सके। बल्लभगढ़ में तुर्क नागरिकों की मौत का मामला प्रकाश में आने पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का माथा ठनक उठा।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनीत चौधरी ने 17 फरवरी, 2006 को हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रधान सचिव को पत्र क्रमांक 401 जेएस (वीसी 2006) भेजा और समूचे मामले की जाँच करने को कहा।
चौधरी ने अपने पत्र में लिखा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को विदेश मंत्रालय से पता चला है कि कुछ टूर ऑपरेटर विदेशियों को सस्ते इलाज का लालच देकर भारत ला रहे हैं। इसलिए मामले की गंभीरता से जाँच की जाए।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्र पर कार्रवाई करते हुए हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी शिवरमन ने फरीदाबाद जिले के तत्कालीन सिविल सर्जन आरसी अग्रवाल को 15 दिन के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। अग्रवाल ने आदेश पर अमल करते हुए बल्लभगढ़ के श्रीराम अस्पताल में तीन तुर्क नागरिकों की मौत की जाँच कराई।
जाँच कार्य से जुड़े डाक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में विदेशी नागरिकों की मौत को संदिग्ध बताते हुए इसकी जाँच विजिलेंस या फिर किसी उच्चस्तरीय टीम से कराने की सिफारिश की।
जिला स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और यह मामला दबकर रह गया, लेकिन जब मुरादाबाद पुलिस ने डॉ. उपेंद्र को गिरफ्तार कर अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया तो तुर्क नागरिकों की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।
फरीदाबाद पुलिस ने आनन-फानन में डॉ. उपेंद्र के खिलाफ तीन तुर्क नागरिकों की मौत का मामला दर्ज कर लिया। प्राथमिकी में कहा गया कि विदेशी नागरिकों की मौत किडनी प्रत्यारोपण के दौरान हुई।
सूत्रों का कहना है कि इन लोगों की मौत गुड़गाँव स्थित डॉ. अमित के अस्पताल में हुई और शव बल्लभगढ़ के श्रीराम अस्पताल भिजवा दिए गए। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए डॉ. उपेंद्र और डॉ. अमित को रिमांड पर ले लिया।
|