माकपा ने शनिवार को आगाह किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी की मार भारत पर पड़ेगी, जिससे हमारे बजट अनुमानें चकनाचूर हो जाएँगे।
माकपा ने कहा मुद्रास्फीति से बचने के लिए तमाम आवश्यक जिंसों में वायदा कारोबार पर तत्काल रदोक लगा देनी चाहिए और भारतीय रुपए की स्थिरता सूनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक उपाय किए जाने चाहिए।
माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि हालाँकि सरकार ने हमारे दबाव के बाद दलहन गेहूँ और चावल को फारवर्ड मार्किट के दायरे से हटा दिया है सट्टेबाजी और मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए तमाम आवश्यक जिंसों में वायदा कारोबार रोक दिया जाना चाहिए।
येचुरी ने कहा कि अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर मान लिया है कि उसकी अर्थव्यवस्था दिक्कत से गुजर रही है। माकपा नेता ने कहा कि अमेरिका में मंदी बढ़ती बेरोजगारी और डॉलर के गिरते मूल्य का विपरीत प्रभाव भारत में पड़ेगा और सरकार को इन हालात से निबटने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान रुपया का मूल्य 13 प्रतिशत बढ़ा है। निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट आई है। आईटी तथा कपड़ा क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इन सब से रोजगार में खासी कमी आएगी। माकपा नेता ने कहा कि इस तरह के हालात ने केन्द्रीय बजट के अनुमानों को अनिश्चितता से रूबरू कर दिया है।
येचूरी ने परमाणु करार पर हस्ताक्षर रोकने के अपनी पार्टी के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हमारा एजेंडा केन्द्र में संप्रग सरकार को अस्थिर नहीं करना है, बल्कि परमाणु करार को रोकना है। यह सरकार को फैसला करना है कि उसका भावी कदम क्या होगा।
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