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सरकार पर बरसी भाजपा और माकपा
जलश्व सौदे में शर्त पर बरसी भाजपा और माकपा
मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और सरकार की समर्थक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी दोनों ने ही जंगी जहाज जलश्व को लेकर अमेरिका की शर्तों में बँधने पर सख्त एतराज किया है और यह मामला संसद में उठाने की घोषणा की है।

देश के सरकारी खातों की जांच करने वाली राष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट में कल खुलासा किया गया था कि सौदे की शर्तों के अनुरूप भारतीय नौसेना इस जंगी जहाज को जंग में तैनात नहीं करेगी और इसके इस्तेमाल की पुष्टि करने के लिए समय समय पर अमेरिकी प्रतिनिधि मुआयना करने आ सकते हैं।

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने एक बयान में कहा कि अगर जंगी पोत को जंग में नहीं भेजा जाएगा तो सरकार बताए, उसने यह पोत मार्केट में सजाने के लिए लिया है क्या? भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका की इस शर्त को मानना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है और पार्टी इसे संसद में उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस खरीदारी में जनता का पैसा लगा हुआ है और उसे ऐसी फिजूल की खरीदारी पर बर्बाद नहीं किया जा सकता।

अमेरिका की नौसेना में 36 साल सेवा दे चुके इस पोत को खरीदने के निर्णय को सरकार ने 31 जुलाई 2006 को मंजूरी दी थी और उसी दिन इसके सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए थे। उस समय रक्षा मंत्रालय की बागडोर मौजूदा विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के हाथों में थी।

माकपा के पोलित ब्यूरो ने भी इस खुलासे के बाद सख्त बयान जारी किया है और सरकार के सामने अनेक सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि है कि इस सौदे पर वह सरकार से संसद में बयान देने की माँग करेगी।

पोलित ब्यूरो ने कैग की रिपोर्ट का हवाल देते हुए पूछा है कि क्या यह सब अमेरिकी हथियार एवं रक्षा उपकरण खरीदने को लेकर बुश प्रशासन के दबाव में किया गया।
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