हाल में गैस लीक दुर्घटना का शिकार हुए भारतीय नौसेना के जंगी पोत आईएनएस जलश्व की खरीद प्रक्रिया में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अनियमितताओं का शुक्रवार को खुलासा कर दिया, जिसे अमेरिका से दो सौ करोड़ रुपए की लागत से लिया गया है।
संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कैग ने रहस्योद्घाटन किया कि भारतीय नौसेना ने अमेरिका से यह 'पुराना और खराब हालत वाला' पोत बिना देखे ही खरीद लिया।
रिपोर्ट के अनुसार 'भौतिक निरीक्षण' नहीं करने का ही नतीजा था कि उसकी मरम्मत की जरूरतों में भी भारी बदलाव करना पड़ा और यह लागत डेढ़ करोड़ डॉलर यानी साठ करोड़ रुपए बढ़ गई। इतना ही नहीं, इस बढ़ी हुई लागत के लिए नौसेना ने इसकी खरीद की मंजूरी लेते समय सक्षम अमले को पूरी लागत का ब्योरा भी नहीं दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय नौसेना ने विदेशी नौसेना की बातों पर कुछ ज्यादा ही भरोसा कर लिया और 36 वर्ष पुराना पोत खरीद लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पोत को खरीदने का नौसेना का फैसला उचित नहीं लगता। कैग ने कहा है कि नौसेना ऐसा कोई ठोस कारण नहीं बता पाई जिससे उसका यह दावा माना जा सके कि यह जंगी पोत दस से पंद्रह साल चलेगा।
उल्लेखनीय है कि पानी से जमीन पर युद्ध छेड़ने वाले लैंडिंग पोत यूएसएस ट्रैंटन को भारतीय नौसेना में पिछले साल 22 जून को आईएनएस जलश्व नाम से शामिल कर लिया गया। कुछ समय पहले ही इस पोत में जहरीली गैस रिसने के हादसे में छह नौसैनिक मारे गए थे।
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