डिपाजिटरी खातों के लिए स्थायी खाता संख्या 'पैन' अनिवार्य कर दिए जाने के बाद भी खाताधारकों खाताधारकों द्वारा पैन नंबर नहीं दिए जाने से अब तक करीब 19 लाख डी-मेट खाते सील किए जा चुके हैं और इनमें 627 अरब 30 करोड़ रुपए के शेयर बंद हो गए हैं।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश में ऐसे बंद डी-मेट खातों की संख्या सर्वाधिक है। वित्त राज्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 8 मार्च 2008 की स्थिति के अनुसार एनएसडीएल और सीडीएसएल में कुल मिलाकर 18 लाख 67 हजार डिपाजिटरी यानी डी-मेट खाते बंद किए जा चुके हैं, जिससे इनमें 627 अरब 30 करोड़ रुपए के शेयर भी बंद हो गए हैं।
भाजपा के अविनाश राय खन्ना के सवाल के जवाब में बंसल ने यह भी बताया कि एक जनवरी 2007 से लेकर 8 मार्च 2008 के बीच कुल 24 लाख 84 हजार नए डी-मेट खाते खोले गए। उन्होंने बताया कि ताजा स्थिति के अनुसार डी-मेट खातों में 6040 अरब रुपए के शेयर जमा हैं। डी-मेट खाते शेयरों को रखने की नई व्यवस्था है। विभिन्न बैंकों में इस प्रकार के खाते खोले जाते हैं।
कंपनियों के शेयर सीधे इन्हीं खातों में आते हैं और यहीं से बेचे भी जाते हैं। खाताधारक केवल आदेश जारी करता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 8 मार्च की स्थिति के मुताबिक नेशनल सिक्युरिटीज डिपाजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपाजिटरी सिक्युरिटीज लिमिटेड (सीडीएसएल) में कुल 18 लाख 67 हजार डी-मेट खाते पैन नहीं मिलने की वजह से बंद किए गए। ऐसे सर्वाधिक 2.73 लाख खाते महाराष्ट्र में बंद हुए। उसके बाद 1.85 लाख तमिलनाडु में, 1.77 लाख गुजरात में और 1.74 लाख आंध्रप्रदेश में बंद किए गए। इन खातों में अरबों रुपए के शेयर भी बंद पड़े हैं।
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