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सभरवाल मामला नागपुर स्थानांतरित
हिमांशु सभरवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने बहुचर्चित प्रो. एचएस सभरवाल हत्याकांड मामले की सुनवाई को बुधवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन से महाराष्ट्र के नागपुर स्थानांतरित कर दिया।

न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की पीठ ने प्रो. सभरवाल के पुत्र हिमांशु सभरवाल की याचिका पर मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश से बाहर किए जाने का आदेश दिया।

इससे पहले याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार इस हत्याकांड में कथित रुप से संलिप्त पार्टी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेताओं को बचाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार अभियोजन पक्ष के 51 गवाहों में से अधिकांश अपनी गवाही से मुकर चुके हैं क्योंकि आरोपियों और राज्य पुलिस ने उन्हें डराया-धमकाया है।

न्यायालय ने गवाहों को दोबारा बुलाने के लिए निचली अदालत के पास जाने की याचिकाकर्ता को अनुमति भी दी। हिमांशु के अनुसार जेलों में हत्याकांड के आरोपियों के साथ अतिविशिष्ट लोगों जैसा व्यवहार किया जा रहा है और हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने एक आरोपी विमल तोमर से अस्पताल में करीब आधे घंटे तक भेंट की थी। याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि जब तक मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है, इस मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है।

वर्ष 2006 में कालेज छात्र संघ का चुनाव रद्द करने को लेकर प्रो. सभरवाल के साथ बुरी तरह मारपीट करने के मामले में एबीवीपी के राजीव रंजन अकेला और विमल तोमर समेत आठ से अधिक आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। उज्जैन के माधव कालेज के शिक्षक प्रो. सभरवाल की मारपीट के बाद मौत हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत : माधव महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डां. शिव शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सिद्ध हो गया है कि सभरवाल हत्याकांड में कमजोर साक्ष्य तथा उसे लचीला बनाया गया। हत्याकांड बाद इसे लेकर यहाँ शिक्षकों ने आंदोलन जुलूस धरना प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया था।

शर्मा ने बताया कि शिक्षा जगत में प्रसन्नता का माहौल है तथा इस आदेश ने शिक्षकों का फिर से गौरव स्थापित किया गया है। इससे न्याय पालिका पर लोगों का विश्वास ओर दृढ़ होगा।
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