भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए चौदह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी, लेकिन अंतिम फैसला करने में चुनाव समिति को काफी जद्दोजहेद करनी पड़ी। पूर्व सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को राज्यसभा का टिकट नहीं मिल पाया।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथसिंह की अध्यक्षता में चार घंटे से ज्यादा समय तक चली बैठक में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और उड़ीसा से नाम तय करने में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इन प्रदेशों के नेताओं से मान-मनौव्वल करनी पड़ी है।
मध्यप्रदेश से दावेदारों की लम्बी फेहरिस्त में प्रभात झा एक प्रबल दावेदार बनकर उभरे। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का भारी समर्थन हासिल होने के कारण चुनाव समिति में उनका विरोध करने का किसी में साहस नहीं था, लेकिन मध्यप्रदेश से बलवीर पुंज को उम्मीदवारी देने के प्रस्ताव पर प्रदेश नेतृत्व ने कड़ा विरोध किया, जबकि उन्हें आडवाणी का आशीर्वाद प्राप्त था। इसके बाद पुंज को उड़ीसा से राज्यसभा का प्रत्याशी बनाने का फैसला हुआ।
गुजरात से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पुरषोत्तम रूपाला, प्रदेश के वरिष्ठ नेता भरतसिंह परमार और ओबीसी के नेता नट्टूजी भालाजी ठाकुर, तो मध्यप्रदेश से मायासिंह को दोबारा राज्यसभा की उम्मीदवारी दी गई है। भाजश छोड़कर भाजपा में लौटे रघुनंदन शर्मा को भी प्रत्याशी बनाने का फैसला किया गया।
राजस्थान से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम माथुर तथा वर्तमान राज्यसभा सांसद डॉ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया को दोबारा राज्यसभा में भेजने का फैसला किया है। इसी तरह झारखंड से जयप्रकाश नारायण सिंह को उम्मीदवारी दी गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार बिहार से भाजपा की खाते की एकमात्र सीट के लिए भी कई नेता दावेदार थे जिनमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर, राजीव प्रताप रूड़ी, राधानाथसिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा, केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष तथा जानी-मानी लेखिका साहित्यकार श्रीमती मृदुला सिन्हा के नाम शामिल थे। चुनाव समिति में काफी चर्चा के बाद अंततः डॉ. ठाकुर के नाम पर मोहर लगा दी गई।
इसी तरह से महाराष्ट्र से भाजपा की एकमात्र सीट के लिए दावेदारों में प्रकाश जावडेकर का नाम सबसे प्रमुख था, लेकिन चुनाव समिति की बैठक के दौरान मुंबई और दिल्ली के बीच मोबाइल घंटी बार-बार बजने से संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई और अचानक राकांपा के वर्तमान राज्यसभा सांसद दत्ता मेघे का नाम सुर्खियों में उभरा। इस बार राकांपा ने मेघे को टिकट नहीं दिया है।
अगले वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा के महाराष्ट्र के नेताओं ने मेघे का नाम तुरुप के पत्ते के रूप में रखा लेकिन बाद में पार्टी ने संभवतः मेघे को लोकसभा चुनाव लड़ाने का मन बना लिया और इस तरह जावडेकर की राज्यसभा की राह आसान हो गई।
बैठक कक्ष के बाहर विभिन्न राज्यों के प्रमुख नेताओं से बातचीत से ज्ञात हुआ कि इस बार झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के नेताओं ने अपने राज्य के बाहरी नेताओं को राज्यसभा के लिए 'एडजस्ट' करने से साफ मना कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक चुनाव समिति की बैठक को राज्यों से जुड़े नेताओं के 'बाहरी' अर्थात दिल्ली से थोपे हुए उम्मीदवारों के विरोध के कारण ही लम्बा खींचना पड़ा।
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