अधिग्रहण से लेकर धन कमाने में अग्रणी भारतीय कंपनियाँ नौकरियाँ देने में भी आगे हैं। एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को नियुक्तियों के मामले में आशावादिता के लिहाज से दूसरा स्थान दिया गया है।
एक नए सर्वेक्षण में कहा गया है कि आने वाली तिमाही में भी भारतीय कंपनियाँ बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ करने की योजना बना रही हैं। सबसे अधिक नियुक्तियाँ खनन एवं निर्माण क्षेत्र में होने का अनुमान लगाया गया है। इस सर्वेक्षण में रोजगार परिदृश्य के लिहाज से भारत दुनिया में दूसरे सबसे अधिक आशावान देश के रूप में सामने आया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश के लगभग 36 प्रतिशत नियोक्ताओं की इस साल अप्रैल जून तिमाही में नियुक्तियों के मामले में सकारात्मक योजनाएँ हैं।
'मैनपावर एम्पालयमेंट आउटलुक सर्वे' विश्व स्तर पर 32 देशों में किया गया। इसका निष्कर्ष यही है कि भारतीय नियोक्ता नियुक्ति संबंधी मंशा के मामले में सबसे आशावान बने हुए हैं।
मैनपॉवर के प्रबंध निदेशक नरेश मल्हान ने कहा कि अप्रैल-जून अवधि में नियुक्ति अवधारणा के लिहाज से भारतीय नियोक्ता दुनिया में दूससे सबसे अधिक आशावादी हैं। भारत से पहले सिंगापुर के नियोक्ताओं को रखा गया है।
मल्हान कहा कि इस सर्वेक्षण में भारत के साथ पेरू एवं रोमानिया दूसरे नंबर पर हैं। इन देशों में नियोक्ताओं का रुख उत्साहजनक है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में सिंगापुर के नियोक्ता 60 प्रतिशत के नेट इम्पलायमेंट आउटलुक के साथ सबसे अधिक आशावान माने गए हैं। भारत (36 प्रतिशत) दूसरे स्थान पर है। नियुक्ति भविष्यवाणी के लिहाज से चीन को सबसे कमजोर माना गया है।
वर्ष 2008 की पहली तिमाही की तुलना में भारत के आउटलुक में छह प्रतिशत अंकों की गिरावट भले ही आई हो लेकिन साल दर साल आधार पर इसमें पाँच प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
क्षेत्रवार नियुक्तियों की बात की जाए तो खनन एवं निर्माण क्षेत्र सबसे ऊपर है। इसके अलावा लोक प्रशासन शिक्षा थोक एंव खुदरा कारोबार क्षेत्र में भी उत्साहजनक माहौल है। मल्हान ने कहा कि उक्त क्षेत्रों के नियोक्ताओं की सबसे मजबूत नियुक्ति योजनाएँ हैं।
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