विश्व की उभरती आर्थिक शक्तियों भारत और चीन के लिए बढ़ती महँगाई खासा सिरदर्द बनती जा रही है।
देश में 23 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में महँगाई मापने के पैमाने की इकाई मुद्रास्फीति की दर दस महीनों में सर्वाधिक 5.02 प्रतिशत पर पहुँच गई। यह भारतीय रिजर्व बैंक की लक्ष्मण रेखा से अधिक है। इसी तरह से चीन में जनवरी में 11 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए मुद्रास्फीति की दर 7.1 को छू गई।
पिछले सप्ताह चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने नेशनल कांग्रेस की सालाना रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि देश में पिछले वर्ष मुद्रास्फीति की दर 4.8 प्रतिशत रही है जो सरकार की लक्ष्य तीन प्रतिशत से काफी अधिक है। चीन में मुद्रास्फीति की दर बढ़ने के मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं और आवास का महँगा होना रहा है।
वेन ने कहा कि बढ़ती महँगाई से चीन के सामाजिक ताने-बाने को खतरा पैदा हो गया है। बढ़ती महँगाई और मुद्रास्फीति का दबाव लोगों के लिए चिंता का विषय बन रहा है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर वाईवी रेड्डी ने सप्ताहांत में पेरिस में कहा कि कीमतों को स्थिर रखना पहली प्राथमिकता है क्योंकि इससे भारी संख्या में गरीब लोग प्रभावित होते हैं। उधर चीन में भी महँगाई ने उसकी दो अंकों की विकास दर को निगलना शुरू कर दिया है।
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