किसानों की कर्ज माफी के चुनावी रथ पर सवार होकर रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने विपक्षी राजग पर हमला बोल दिया। यहाँ रामलीला मैदान की इस रैली में 'जय किसान' की गूँज के बीच कांग्रेस अध्यक्ष तथा प्रधानमंत्री दोनों ने किसानों की दुर्दशा का ठीकरा पूरी तरह वाजपेयी सरकार के सिर पर फोड़ दिया और आतंकवाद से निपटने को लेकर पिछली सरकार की जमकर खिल्ली उड़ाई।
पूरे रैली स्थल पर 'राहुल गाँधी के पोस्टरों' के बीच श्रीमती गाँधी और डॉ. सिंह दोनों ने ही 'परमाणु करार' और चुनाव का नाम भी जुबान से नहीं निकाला, लेकिन पार्टी का पूरा मूड जनता की अदालत में जाने की जबरदस्त तैयारी को बयान कर रहा है।
लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के माथे पर महँगाई से आए पसीने की बूँदें भी साफ झलक रही थीं। किसानों के मामले में श्रीमती गाँधी ने राजग पर 'उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे' का तीर छोड़ा लेकिन महँगाई को 'हम सबकी समस्या' करार दिया और कहा कि सरकार इसे काबू में करेगी। श्रीमती गाँधी ने कहा कि भाजपा नीत सरकार के कार्यकाल में क्या-क्या हुआ और किस तरह से आतंकवादियों की मेहमाननवाजी हुई, यह बात किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमें भाजपा से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
महँगाई के अलावा महाराष्ट्र में चल रही क्षेत्रवादी राजनीति के मुद्दे पर भी कांग्रेस बचाव की मुद्रा में दिखाई दी। इस मुद्दे पर श्रीमती गाँधी दबी जुबान में इतना ही कह पाई कि जो लोग क्षेत्रीय और धार्मिक आधार पर भेदभाव का व्यवहार करते हैं, उनके खिलाफ नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। यह देश सबका है और इस पर सबका बराबरी का अधिकार है।
परमाणु करार पर तो कांग्रेस की जुबान ही एकदम सिली हुई दिखी। और तो और परमाणु समिति के सूत्रधार विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी तक ने भी परमाणु शब्द का उच्चार नहीं किया। वे कल ही स्पष्ट कर चुके थे कि कांग्रेस करार की कीमत पर सरकार नहीं गँवाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा किसानों और कृषि क्षेत्र को अहमियत दी है और इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए किसानों के 60 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने सत्ता में आने के बाद किसानों और गरीबों के हित में कई कदम उठाए हैं और 60 हजार करोड़ रुपयों की कर्ज माफी का फैसला किसानों के कंधों का बोझ कम करने का एक 'ऐतिहासिक फैसला' है। डॉ. सिंह ने कहा कि वे इसे सरकार पर बोझ नहीं मानते बल्कि किसानों के प्रति अपना फर्ज मानते है।
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