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बराक मामले में नंदा समेत चार गिरफ्तार
अदालत ने पूछताछ की अनुमति दी
सीबीआई ने 1000 करोड़ रुपए के विवादास्पद बराक मिसाइल सौदे में कथित तौर पर लाभ लेने के इरादे से साजिश रचने वाले रक्षा सौदा बिचौलिए सुरेश नंदा, उसके बेटे संजीव नंदा, चार्टर्ड एकाउंटेंट बिपिन शाह और आयकर उपनिदेशक (अन्वेषण) आशुतोष वर्मा को शनिवार रात मुंबई के एक पाँच सितारा होटल से गिरफ्तार कर लिया।

सीबीआई के मुताबिक ये चारों होटल में विचार-विमर्श और रकम के बँटवारे के लिए एकत्र हुए थे। इन चारों को रविवार दोपहर को सीबीआई की अदालत में पेश किया।

न्यायाधीश एनएन सरदेसाई ने कहा कि अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक प्रांरभिक साक्ष्य मौजूद हैं और आगे की जाँच के लिए सीबीआई को उन चारों को आगे पूछताछ के लिए राजधानी दिल्ली ले जाने की अनुमति दे दी।

सुरेश नंदा रक्षा सौदा बिचौलिए के रूप में जाना जाता है। सीबीआई ने देश भर में रक्षा सौदा दलाल और उसके सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों पर छापे मारने के एक दिन बाद नंदा और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई नंदा का पासपोर्ट पहले ही जब्त कर चुकी है। नंदा का पुत्र संजीव नंदा बीएमडब्ल्यू कांड का मुख्य अभियुक्त भी है। गिरफ्तार किए गए चारों अभियुक्तों के नई दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई और गोवा स्थित विभिन्न ठिकानों पर जाँच जारी है।

न्यायाधीश सरदेसाई ने ट्रांसिट रिमांड पर अभियुक्तों को भेजते हुए कहा कि इस मामले में आयकर अधिकारी के नंदा और अन्य के पक्ष में कार्य करने के प्रांरभिक साक्ष्य हैं।

अदालत ने अभियुक्तों से यह भी जानना चाहा कि क्या सीबीआई ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया है जिसका उन्होंने नहीं में जबाव दिया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि अभियुक्तों की तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और बहुत अधिक नकद राशि मिली है।

अदालत ने सीबीआई की अभियुक्तों को ट्रांसिट रिमांड पर देने की माँग स्वीकार करते हुए कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जाँच आवश्यक है, जिसके लिए अभियुक्तों को हिरासत में भेजना जरूरी है।

गौरतलब है कि आयकर विभाग (अन्वेषण) ने वर्ष 2007 में नंदा के कार्यालय पर छापा मारकर कुछ ऐसे कागजात बरामद किए थे, जिनसे नंदा और उसके सहयोगियों के विभिन्न रक्षा सौदों में शामिल होने के संकेत मिले थे।

वर्मा इस मामले की जाँच कर रहे थे। उन पर आरोप है कि एक षड्‍यंत्र के तहत उन्होंने इस रक्षा सौदे बिचौलिए और उसके पुत्र से मोटी रकम हासिल कर जाँच रिपोर्ट को उनके अनुकूल बना दिया।

वर्मा ने नंदा और उसके बेटे को सीबीआई और अन्य जाँच एजेंसियों से बचाने के एवज में मोटी रकम हासिल कर अपनी जाँच रिपोर्ट को जानबूझकर रोक लिया और चार्टर्ड एकांउटेंट बिपिन शाह की मदद से इस रिपोर्ट में नंदा के मनमुताबिक बदलाव कर दिए।
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