रोजगार मुहैया कराने में निजी सुरक्षा उद्योग एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है जो हर साल युवाओं के लिए 10 लाख नौकरियाँ पैदा कर रहा है। निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या हर साल 25 प्रतिशत बढ़ रही है और देश में इस तरह की लगभग 15 हजार एजेंसियाँ पंजीकृत हैं।
सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (सीएपीएसआई) के अनुसार यह सुनिश्चित करने के लिए निजी सुरक्षाकर्मी काम में सामने आने वाली विभिन्न परिस्थितियों से निपट सकें इसके लिए भर्ती किए गए लोगों को 20 दिन का आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है।
सीएपीएसआई के अध्यक्ष कंवर विक्रमसिंह का कहना है देश में पंजीकृत 15 हजार निजी सुरक्षा एजेंसियां हर साल 10 लाख नई नौकरियाँ पैदा कर रही हैं। यह आँकड़ा अन्य किसी सेवा क्षेत्र द्वारा मुहैया कराए जाने वाले रोजगार की तुलना में सर्वाधिक है। उद्योग वृद्धि की मदद निजी सुरक्षा एजेंसी (नियमन) अधिनियम 2005 के तहत की जा रही है। यह कानून इस उद्देश्य से लाया गया था कि इस तरह की एजेंसियाँ पुलिस बलों के अनुपूरक के रूप में काम करेंगी। हालाँकि इसे गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों ने ही क्रियान्वित किया है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता सहायक पुलिस आयुक्त राजन भगत का कहना है पुलिस के लिए हर जगह अपने कर्मी तैनात करना संभव नहीं है। निजी सुरक्षा एजेंसियों को पुलिस की मदद करने के लिए उत्साहित करना एक अच्छा कदम है।
उन्होंने कहा निजी सुरक्षा एजेंसियां हमारे लिए मददगार हैं खासकर शॉपिंग मॉल्स व्यक्तिगत समारोहों या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से। भगत ने कहा कि समय समय पर पुलिस निजी सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा संबंधी मामलों पर चर्चा करती रहती है।
|