माकपा ने कहा कि सरकार को केवल संप्रग-वामदल समिति के निष्कर्ष के आधार पर भारत अमेरिका परमाणु करार पर अगला कदम उठाना चाहिए और अगर समिति इसे मंजूरी नहीं देती है तो सरकार को समझौता निरस्त कर देना चाहिए।
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि आज भी विएना में बातचीत चल रही है। इस बातचीत में हमारी चिंताओं को दूर किया जाता है या नहीं यह समिति की अगली बैठक में ही पता चलेगा।
उन्होंने कहा संप्रग ने लिखित तौर पर सहमति दी है कि सरकार समिति के निष्कर्ष के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगी। यदि समिति कहती है कि यह समझौता सही नहीं है तो सरकार को इस पर अमल करना पड़ेगा।
येचुरी ने कहा कि संप्रग के कुछ साझीदारों तक का भी मानना है कि वामदलों की चिंताएँ जायज हैं और पार्टियाँ इन चिंताओं का निदान चाहती हैं। उन्होंने कहा सरकार का मानना है कि यह समझौता राष्ट्रहित में है, लेकिन हमारा मानना है कि ऐसा नहीं है। फिलहाल बातचीत जारी है।
भाकपा महासचिव एबी बर्धन की समर्थन वापसी की धमकी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा हमारा एजेंडा परमाणु समझौते को लेकर है न कि सरकार की स्थिरता या समय से पूर्व चुनाव। इस बारे में सरकार को निर्णय लेना है।
येचुरी ने साथ ही विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का अस्तित्व परमाणु समझौते से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह पूछे जाने पर कि संप्रग-वामदल पेनल की अगली बैठक कब होगी, उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के एक-दो दिनों में वापस लौटने की संभावना है। टीम की वापसी के बाद ही अगली बैठक होगी।
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