सरकार से समर्थन वापसी की वाम दलों की धमकियों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने साफ किया कि न तो कांग्रेस और न ही इसके सहयोगी दल 2009 के पहले चुनाव चाहते हैं। भारत-अमेरिका असैन्य करार की खातिर सरकार को भेंट चढ़ाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता।
मुखर्जी ने कहा कि भारत ने अमेरिका से कह दिया है कि करार को अमली जामा पहनाने के लिए वह निर्धारित समय के भीतर काम नहीं कर सकता।
समय पूर्व चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने एक टीवी चैनल से कहा कि मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि हम निर्धारित समय (2009) पर चुनाव चाहते हैं।
गठबंधन की राजनीति में अनेक अनदेखी चीजें होते रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन जिन बातों का आपने उल्लेख किया है वे अज्ञात नहीं हैं क्योंकि वाम दलों के रुख से हम भली-भाँति परिचित हैं।
उन्होंने ये बातें परमाणु करार को प्रभावी बनाने की स्थिति में सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में वाम दलों की धमकी से जुड़े सवाल के जवाब में कहीं।
मुखर्जी ने कहा मैं नहीं मानता कि कोई भी समय पूर्व चुनाव की सोच रहा है। गठबंधन का कोई भी सहयोगी या समर्थक समय पूर्व चुनाव की बात नहीं कर रहा हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या परमाणु करार के लिए सरकार की कुर्बानी सही रहेगी, इसके संबंध में कांग्रेस में कोई बहस है तो मुखर्जी ने कहा कोई भी फिलहाल चुनाव कराने की बात नहीं कर रहा है। किसी चीज के लिए सरकार को भेंट चढ़ाने की चर्चा नहीं है।
वाम दलों ने परमाणु करार को प्रभावी बनाने से जुड़े मुद्दे पर अपना रुख कड़ा कर लिया है, जिससे समय पूर्व चुनाव के कयास लगाए जाने लगे हैं।
भाकपा महासचिव एबी वर्धन द्वारा सरकार से समर्थन वापसी के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को कल भेजे गए धमकी भरे पत्र के बारे में पूछे जाने पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने पत्र को नहीं देखा है बल्कि इसके बारे में सिर्फ अखबारों में पढ़ा।
उन्होंने हालाँकि माकपा महासचिव प्रकाश करात द्वारा लिखे पत्र का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने संप्रग वाम समिति की बैठक जल्द बुलाने की बात कही थी।
विदेशमंत्री ने कहा इसमें उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि हमारी व्यवस्था के अनुसार हमें मिलना चाहिए। हमने अखबारों में पढ़ा है कि आईएईए के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है। इसलिए 15 मार्च तक बैठक निर्धारित कीजिए। वाम दलों की धमकियों को बहुत ज्यादा महत्व न देते हुए मुखर्जी ने कहा कि इसमें नया कुछ भी नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि संप्रग वाम की अगली बैठक में अगर वाम दल करार पर आगे नहीं बढ़ने की माँग करते हैं तो मुखर्जी ने कहा उनकी क्या माँग होगी और हमारा क्या जवाब होगा, इससे निपटना मैं जानता हूँ।
आईएईए के साथ बातचीत पूरी करने तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी हासिल करने के संबंध में अमेरिकी सीनेटरों द्वारा तय की गई मई तक की समय सीमा के बारे में उन्होंने कहा उनकी चुनाव प्रक्रिया के कारण निश्चित तौर पर समय सीमा है। इसलिए उन्होंने इसकी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि लेकिन जहाँ तक भारत का सवाल है तो हमने उनसे कहा कि किसी निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करना हमारे लिए संभव नहीं है।
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