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मनमोहन की 'भीष्म पितामह' से अपील
अमेरिका के साथ परमाणु करार के विरोध को 'संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ' बताते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने 'राजनीति के भीष्म पितामह' अटलबिहारी वाजपेयी से इस समझौते के बारे में अंतरआत्मा की आवाज सुनने की गुहार लगाई।

वाम दलों की खामोश बैंचों से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, लेकिन भाजपा के सदस्य उखड़ गए। पूर्व विदेशमंत्री यशवंत सिन्हा ने गुस्से में पूछा कि क्या परमाणु करार का विरोध करना राष्ट्र विरोधी बात है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्तात पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सिंह ने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेशमंत्री टॉलबोट के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा कि पूर्व विदेशमंत्री जसवंतसिंह तो अमेरिका के साथ मौजूदा समझौते से बहुत कमतर समझौता करने को तैयार थे। उन्होंने कहा- अब मैं राजनीति के भीष्म पितामह अटल बिहारी वाजपेयी से आग्रह कर रहा हूँ कि वह परमाणु करार के बारे में अपनी आत्मा की आवाज सुनें और पार्टी की संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से जुड़ी सोच से ऊपर उठें।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में भारत के बारे में निगरानी समझौता सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की उम्मीद है और घरेलू मोर्चे पर इस पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है।
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