सरकार ने कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत जारी है तथा इस समझौते को लेकर देश के भीतर व्यापक राजनीतिक आम सहमति बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में दिए बयान में दोहराया कि अमेरिका के हाइड एक्ट का उसके साथ भारत के असैन्य परमाणु करार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हाइड एक्ट के बारे में हाल में आए कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बयान के मद्देनजर उन्होंने यह स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने कहा कि हाइड एक्ट अमेरिकी प्रशासन और वहाँ की संसद (कांग्रेस) के बीच का मुद्दा है, जहाँ तक भारत का संबंध है, वह केवल 123 समझौते से बँधा है जिस पर अमेरिका के साथ हमारी सहमति हो चुकी है। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार को आशा है कि परमाणु मुद्दे पर हो रही प्रगति से भारत के खिलाफ तीन दशकों से लगे अनुचित प्रतिबंध समाप्त होंगे तथा रूस, अमेरिका, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन आदि देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग के दरवाजे खुल जाएँगे। उन्होंने कहा कि इनमें से बहुत देशों के साथ द्विपक्षीय परमाणु सहयोग समझौते के बारे में बातचीत चल रही है तथा समझौते सन्निकट हैं।
उन्होंने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरुप सरकार स्वतंत्र विदेश नीति पर अमल करती रहेगी।
मुखर्जी ने कहा- अभी हम आईएईए के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि भारत के लिए निगरानी उपाय संबंधी करार पर पहुँचा जा सके। ऐसा करार संपन्न किए जाने से परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह भारत के पक्ष में असैन्य परमाणु व्यापार के लिए अपने दिशा-निर्देशों को संशोधित कर पाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे रूस, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अन्य देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। इनमें से अनेक के साथ द्विपक्षीय परमाणु करारों के संबंध में चर्चा की गई है और ये अंतिम रूप दिए जाने के विभिन्न चरणों में है।
मुखर्जी ने कहा कि इस घटनाक्रम से अंतत: परमाणु सहयोग की अनुचित व्यवस्था और उन प्रतिबंधों का अंत होगा, जिसका सामना भारत पिछले तीन दशकों से करता आ रहा है।
परमाणु समझौते के बारे में देश में छिड़े विवाद के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार देश के भीतर व्यापक राजनीतिक आम सहमति बनाने का प्रयास जारी रखेगी। मुखर्जी ने परमाणु एजेंसी के साथ चल रही वार्ता की प्रगति के बारे में कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया।
मुखर्जी ने कहा कि भारत-अमेरिका असैन्य सहयोग समझौते पर हाइड एक्ट के प्रभावों के संबंध में अमेरिकी अधिकारियों के कुछ वक्तव्यों की ओर सदस्यों का ध्यान गया होगा। इस संबंध में उन्होंने दोहराया कि हाइड एक्ट अमेरिकी सरकार के कार्यकारी और विधायी अंगों के बीच का मामला है। अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु सहयोग के संबंध में भारत के अधिकार और दायित्व द्विपक्षीय 123 करार बँधे है जिस पर अमेरिका के साथ हमारी सहमति हो चुकी है।
विदेशमंत्री ने कहा कि सरकार दक्षिण एशिया और पड़ोसी देशों तथा विश्व की सभी बड़ी ताकतों के साथ घनिष्ठ राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध विकसित करने का अपना प्रयास जारी रखेगी।
उल्लेखनीय है कि आईएईए और भारतीय अधिकारियों के बीच निगरानी उपायों के बारे में बातचीत अंतिम चरणों में है। निगरानी उपाय संबंधी समझौते को संप्रग-वामदलों की समिति के समक्ष रखा जाना है। वामदलों ने स्पष्ट कर दिया है कि समिति के फैसले के बाद ही सरकार समझौते के बारे में कोई अगला कदम उठाए।
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