वित्तमंत्री पी. चिदंबरम मानते हैं कि लोकलुभावन बजट पेश कर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। इस बजट में भी सुधारों के एजेंडे को आगे बढ़ाया गया है। कर्ज माफी के लिए धन कहाँ से आएगा इसका जवाब उन्होंने बाद में देने की बात कही।
किसानों के 60 हजार करोड़ के ऋण माफ करने और आयकर में छूट देने की घोषणा वाला लोकलुभावन बजट पेश करने के बाद एक चर्चा में उन्होंने कहा कि लोकलुभावन कोई गंदा शब्द नहीं है।
पैसा कहाँ से आएगा कर्ज माफी पैकेज के लिए धनराशि कहाँ से आएगी? इस सवाल को वित्त मंत्री यह कहकर टाल गए कि उचित समय पर उचित मंच पर इसका खुलासा किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चार प्रतिशत के उच्च दायरे में नहीं पहुँचने पर सरकार ने इस पैकेज की घोषणा का फैसला किया।
कर्ज माफी पैकेज आखिरी साल में ही क्यों? वित्त मंत्री का जवाब था-कृषि क्षेत्र में विकास की गति बढ़ाने के सुझाव देने के लिए डॉ. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट के बाद ही सरकार ने पैकेज के बारे में फैसला लिया।
रपट आने पर समायोजन वित्त मंत्री किसानों की कर्ज माफी योजना और सरकारी कर्मचारियों के छठे वेतन आयोग से जुड़े सवालों से तनिक भी विचलित नहीं दिखे। बजट में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के लिए कोई प्रावधान नहीं किए जाने के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं के लिए सभी मंत्रालयों के बजट आवंटन में सामान्य वृद्धि का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है।
उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर कर प्रशासन और वसूली से इस व्यय की भरपाई कर ली जाएगी। चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि अगले साल भी अर्थव्यवस्था में गतिविधियाँ उच्चस्तर पर बनी रहेंगी और कर वसूली पिछले सालों की तरह बजट अनुमान से बेहतर होगी। (नईदुनिया)
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