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लोकलुभावन होना खराब बात नहीं-चिदंबरम
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम मानते हैं कि लोकलुभावन बजट पेश कर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। उनके शब्दों में 'लोकलुभावन कोई गंदा शब्द नहीं है' हालाँकि, पिछले बजटों की तरह इस बजट में भी सुधारों के एजेंडे को आगे बढ़ाया गया है।

किसानों के 60 हजार करोड़ के ऋण माफ करने और आम मध्यम वर्ग को आयकर में भारी राहत देने की घोषणा वाला लोकलुभावन बजट पेश करने के बाद रविवार को चिदंबरम ने कहा कि लोकलुभावन कोई गंदा शब्द नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बजट में भी अपने पिछले बजटों की तरह सुधारों के एजेंडे को आगे बढ़ाया है। वह कहते हैं कि इस बजट में उनके पिछले बजटों की तुलना में सुधारों को आगे बढ़ाने की दिशा में ज्यादा उपाय किए गए हैं।

छोटे और मझौले किसानों के 60 हजार करोड़ रुपए के ऋण माफी पैकेज के लिए धनराशि कहाँ से आएगी इस सवाल को वित्तमंत्री यह कहकर टाल गए कि उचित समय पर उचित मंच पर इसका खुलासा किया जाएगा। यह स्थान क्या संसद होगी जवाब था- हमें पता है उचित मंच कौन सा है।

वित्तमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर चार प्रतिशत के उच्च दायरे में नहीं पहुँचने पर सरकार ने इस पैकेज की घोषणा का फैसला किया। कर्ज माफी पैकेज सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल में ही क्यों, वित्तमंत्री का जवाब था कि कृषि क्षेत्र में विकास की गति बढ़ाने के सुझाव देने के लिए डॉ. राधाकृष्णन समिति का गठन किया गया था, समिति की रिपोर्ट इसी साल प्राप्त हुई, उसके बाद ही सरकार ने पैकेज के बारे में फैसला लिया।

सरकार के इस पैकेज से क्या किसानों की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी, कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ जाएगा, जवाब में चिदंबरम ने कहा कि इस पर मुझे यही कहना है कि यह एकबारगी उपाय है, कर्ज के बोझ से मुक्त होने के बाद किसान नए सिरे से उत्साह के साथ खेती के काम में लगेंगे और जरूरत होने पर बैंकों से नया कर्ज ले सकेंगे।
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