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'आडवाणी अल्पसंख्यक विरोधी'
प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्ण आडवाणी द्वारा आम बजट को 'लियाकत अली' का बजट करार दिए जाने पर आल इंडिया कैथोलिक यूनियन ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया।

कैथोलिक यूनियन के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य जॉन दयाल ने कहा कि विपक्ष के आडवाणी के बयान से जाहिर है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में लोकतांत्रिक राजनीति में लम्बे तजुर्बे की परिपक्वता के बावजूद भाजपा का खुमार अभी उतरा नहीं है।

उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की तुलना विभाजन से पूर्व के 'लियाकत अली के बजट' से करना यह साबित करता है कि आडवाणी का अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत का अभियान बदस्तूर जारी है।

दयाल ने कहा कि आडवाणी ऐसा अहसास करा रहे हैं कि मुसलमानों और ईसाइयों के कल्याण के लिए कार्यक्रम चलाना कोई राष्ट्रविरोधी कार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही शरारत है जिसकी वजह से गुजरात में 2002 के दंगों की त्रासदी हुई थी और 2007 में उड़ीसा में क्रिसमस के मौके पर ईसाई धर्मस्थलों पर तोड़फोड़ हुई।

कैथोलिक यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि वैसे बजट में अल्पसंख्यकों को बड़ा उपहार नहीं दिया गया है। इसमें भी ईसाइयों के लिए तो सच्चे मायने में कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भी तो अल्पसंख्यकों में सभी के साथ समान बर्ताव करने के बजाय अपना ध्यान किन्हीं खास अल्पसंख्यक वर्गों पर देती है।

दयाल ने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए की गई घोषणाओं से भी उस व्यक्ति के बयान का मिथ्याचार सामने आ जाता है, जो प्रधानमंत्री बनने की आकांक्षाएँ सँजोए हुए है और बजट को बुरी तरह सांप्रदायिक करार दे रहा है।
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