प्रख्यात मलयालम लेखक सुकुमार अझिकोड ने राज्य कांग्रेस की सांस्कृतिक फोरम द्वारा दिया गया साहित्य पुरस्कार लौटा दिया है।
अझिकोड ने यह पुरस्कार कांग्रेस के अधिकारिक दैनिक द्वारा अपने खिलाफ किए गए निजी हमले के विरोध में लौटाया है। अझिकोड पर यह निजी हमला कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी के एक भाषण पर की गई उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियों के जवाब में है।
जाने-माने शिक्षाविद आलोचक वक्ता और सामाजिक टीकाकार अझिकोड ने कल कोझीकोड में जारी एक बयान में कहा कि वह केरल प्रदेश कांग्रेस समिति की सांस्कृतिक शाखा संस्कार सांहिता द्वारा दिया गया अवॉर्ड खारिज करते हैं, क्योंकि कांग्रेस के मुखपत्र वीक्षणम में प्रकाशित संपादकीय में वह अपने खिलाफ किए गए निजी एवं ओछे हमले से हतप्रभ हैं।
82 वर्षीय अझिकोड ने कहा कि मेरे जीवन में अब से पहले कभी इतने निचले और तुच्छ स्तर के हमले नहीं किए गए। अगर मैं यह पुरस्कार स्वीकार करता हूँ तो इसका मतलब होगा कि मैं 50000 रुपए के लिए अपने आत्मसम्मान को आहत करूँगा।
अझिकोड ने एक अग्रणी मलयाली दैनिक में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्होने सोनिया गाँधी के पिछले माह दिए गए भाषण की आलोचना की थी। सोनिया ने पिछले माह केरल यात्रा के दौरान अपने भाषण में एलडीएफ सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि एलडीएफ के कुशासन से केरल विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। इस पर एलडीएफ और खास कर इसके प्रमुख दल माकपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
वीक्षणम के संपादकीय में अझिकोड पर समय-समय पर निजी लाभ के लिए धारणा बदलते रहने का आरोप लगाया गया है। यह भी कहा गया है कि उनकी कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहा है। संपादकीय में कहा गया है कि अझिकोड माकपा के राज्य सचिव पिनियारी विजयन के लिए भुगतान पर लिखने वाले लेखक बन गए हैं।
नेशनल बुक ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष अझिकोड की रचनाओं को हर वर्ग ने सराहा है। उनका कहना है कि वीक्षणम के संपादकीय से संकेत मिलता है कि कांग्रेस संस्कृति और परंपरा से दूर होती जा रही है। अझिकोड ने कहा कि शालीन भाषा में की गई अपनी आलोचना का उन्होंने हमेशा स्वागत किया है।
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