पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एमएस गिल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को चुनाव आयोग के नोटिस जारी करने को अनुचित बताते हुए इसे पूरी तरह से गलत तथा गैर जरूरी करार दिया है।
गिल ने कड़े तेवर अपनाते हुए रविवार को आरोप लगाया कि यह किसी को परेशान किए जाने की कीमत पर खुद के लिए प्रचार बटोरना है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या इस तरह के विदेशी सम्मान पाना अपराध है। अगर है तो हम विदेशियों को ऐसे नागरिक सम्मान क्यों देते हैं और हमारे नागरिक ऐसे सम्मान अब तक कैसे ग्रहण करते रहे हैं।
गिल ने लाभ के पद मामले में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के खिलाफ तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की भूमिका पर चटर्जी द्वारा सवाल उठाए जाने से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति सचिवालय तथा तब के चुनाव आयोग को इस मामले में ज्यादा समझदारी से पेश आना चाहिए था।
डॉ. गिल ने बातचीत में कहा कि अगर देश की किसी हस्ती को किसी देश की तरफ से एक बड़ा सम्मान दिया जाता है और चुनाव आयोग में इसी बात को लेकर उस हस्ती की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाती है तो आयोग को ऐसी हल्की-फुल्की शिकायतों पर कतई तवज्जो नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की इस तरह के फैसले पर असल में उसकी गंभीरता ही हल्की हो जाने का खतरा रहता है।
गिल ने कहा कि जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब भी आयोग में ऐसी शिकायतें आती रहती थीं, लेकिन आयोग अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वाह करते हुए ऐसी शिकायतों की गंभीरता के आधार पर ही उन पर फैसला लेता था। आयोग को चाहिए कि बेवजह की मामूली शिकायतों का संज्ञान ही नहीं लिया जाए तथा वह अपना ध्यान अन्य महत्वपूर्ण गंभीर मुद्दों पर दे।
उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा दिया गया यह नोटिस पूरी तरह से गैर जरूरी है तथा इस सम्मान पर इतना हंगामा क्यों है, यह बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने अपनी हाल की भारत यात्रा में महान भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर को 'सर' का खिताब दिए जाने की पेशकश की थी। ऐसे में जबकि देश सचिन को सर का खिताब दिए जाने की बेताबी से प्रतीक्षा कर रहा है। देश के एक प्रतिष्ठित विदेशी सम्मान के लिए कठघरे में खड़ा करना वाकई दुखद है।
सोमनाथ चटर्जी मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गिल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद भारत में सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद है। चटर्जी के विचारों से वे पूरी तरह से सहमत हैं। इस शिकायत पर अधिक समझदारी से निबटा जाना चाहिए था।
गौरतलब है कि चटर्जी ने कल कहा था कि कलाम द्वारा लाभ के पद संबंधी सभी मामलों की प्रथम साक्ष्य में जाँच पड़ताल किए बिना उन शिकायतों को चुनाव आयोग के पास भेजना आरोपियों के साथ बड़ा अन्याय था।
गौरतलब है कि आयोग ने श्रीमती गाँधी द्वारा बेल्जियम सम्मान (आर्डर ऑफ लियोपोल्ड) स्वीकार किए जाने पर उनके खिलाफ अयोग्यता की एक याचिका पर श्रीमती गाँधी को नोटिस जारी किया है। यह सम्मान उन्हें 2006 में दिया गया था।
आयोग के सूत्रों के अनुसार आयोग में दो-एक की खंडित राय के बाद श्रीमती गाँधी को नोटिस जारी किया गया। केरल उच्च न्यायालय के वकील पी. राजन ने श्रीमती गाँधी के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज की थी।
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