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गाँधीवादी बाबा आमटे का निधन
महात्मा गाँधी के अभयसाधक बाबा आमटे का शनिवार तड़के महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित उनके आनंदवन आश्रम में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे।

जीवनपर्यंत गाँधीवादी दर्शन में अटूट आस्था रखने वाले प्रख्यात समाजसेवी बाबा आमटे को कुष्ठ रोगियों की सेवा के कारण संत कहा जाता था। उन्होंने तड़के सवा चार बजे अंतिम साँस ली। वे ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। उनके दो पुत्र हैं।

देश के चोटी के समाजसेवी बाबा आमटे ने अपना पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों के उपचार और पुनर्वास के लिए समर्पित कर दिया। समाज में जब कुष्ठ रोगियों को अछूत कहकर अलग कर दिया जाता था ऐसे समय में बाबा ने उनके लिए वरोरा में आनंदवन आश्रम खोला तथा समीपवर्ती सोमनाथ और हेमालकासा में कुछ सामाजिक कल्याण योजनाएँ चलाईं।

गाँधी दर्शन में अटूट आस्था रखने वाले बाबा आमटे ने कई सामाजिक आंदोलनों को भी अपना समर्थन दिया जिनमें मेधा पाटकर के नेतृत्व में चलाया जाने वाला नर्मदा आंदोलन शामिल है।

पीठ में समस्या होने के बावजूद उनका सार्वजनिक जीवन बेहद सक्रिय था। इस समस्या के कारण वह बैठ नहीं पाते थे। करीब दो दशक से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न अवसरों पर या तो खड़े अथवा लेटे हुए देखा जाता था।

अंतिम संस्कार रविवार को : प्रसिद्ध समाजसेवी बाबा आमटे का अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। उनकी इच्छा के अनुसार उनकी पार्थिव देह को दफनाया जाएगा। बाबा की इच्छा थी कि उनको आनंदवन आश्रम में ही दफनाया जाए। कई गणमान्य व्यक्ति बाबा आमटे के अंतिम दर्शन के लिए आनंद आश्रम में पहुँच गए हैं और कई लोग आ रहे हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार, बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे तथा अन्य मंत्रियों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अन्य लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।
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