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स्कूली बच्चों ने पढ़ा पत्रकारिता का पाठ
दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में हाथों में नोटबुक और कलम लिए भीड़ के बीच घूमते और लोगों से कुछ पूछते नन्हे रिपोर्टरों का दल आपको नजर आ जाएगा। 10 से 15 वर्ष के बीच के इन नन्हे पत्रकारों के लिए यह रोजमर्रा का विषय बन गया है और यहाँ आने वाले आगंतुकों से ये प्रश्नों की झड़ी लगा देते हैं।

विश्व पुस्तक मेले से जुड़ी प्रमुख घटनाओं को सँजोए अखबार 'अक्कड़ बक्कड़ टाइम्स' समय पर निकालने के लिए ये नन्हे रिपोर्टर जी-जान से जुटे हैं और यहाँ होने वाली सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

अखबार को निकालने का विचार नेशनल बुक ट्रस्ट ने पेश किया था और इसमें राष्ट्रीय बाल भवन के साथ सहयोग किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देना है।

विश्व पुस्तक मेले की दैनिक गतिविधियों पर नजर रखने के अलावा अक्कड़ बक्कड़ टाइम्स में यहाँ आने वाले प्रमुख लोगों के साक्षात्कार नटखट सूझबूझ शीर्षक के तहत कार्टून कविताएँ और संपादकीय भी शामिल होंगे।

नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक मानस रंजन महापात्र ने बताया यह खुशी की बात है कि इस अखबार में संपादकीय भी बच्चों द्वारा ही लिखा जाएगा। बच्चों द्वारा लिखी गई कापियों को संपादित करना काफी सब्र का काम है, लेकिन यह वास्तव में काफी रोमांचक है।

इसके तहत राष्ट्रीय बाल भवन ने विभिन्न स्कूलों के 12 बच्चों को पत्रकार के तौर पर चुना गया है। इस दैनिक का रोज प्रकाशन किया जाता है और विश्व पुस्तक मेले के सभी स्टालों पर वितरित किया जाता है।
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