पंजाब से सिख आतंकवाद को समाप्त करने का श्रेय पाने वाले वहाँ के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने सोमवार को कहा कि विश्व पर इस्लामी प्रभुत्व स्थापित करने की मानसिकता से चलाए जा रहे आतंकवाद से निपटने के लिए जरूरी है कि इसमें लिप्त पाए जाने वाले घुसपैठियों के पकड़े जाने पर उन्हें सीमा से बाहर करने के बजाय मार दिया जाए।
गिल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख केसी सुदर्शन द्वारा 'इस्लामी मदरसे बेनकाब' का लोकार्पण किए जाने के एक समारोह में उपस्थित लोगों से सवाल किया कि आतंकवादी के पकड़े जाने पर क्या करना चाहिए?
कुछ देर पसरी खामोशी को उन्होंने खुद ही तोड़ते हुए कहा पकड़कर मार देना चाहिए। उसे पकड़कर देश की सीमा से बाहर फेंकना ही काफी नहीं है। वह वापस आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसा करके हम देश ही नहीं दुनिया को बचाएँ। इसके साथ उन्होंने शिकायत की कि पंजाब से आतंकवाद को जब समाप्त किया गया तो उम्मीद थी कि जिन जवानों और अधिकारियों ने उस मुहिम को कामयाब बनाने में काम किया है, उसके लिए उन्हें और उस दौरान लगभग जो 2000 सुरक्षाकर्मी मारे गए उनके परिवारों को सरकार की ओर से सिला मिलेगा, लेकिन उन्हें सिला नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि पंजाब से आतंकवाद खत्म करने की जो हिम्मत उस समय दिखाई गई वह हिम्मत आज कोई नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि 1961 में असम के वृंदानगर इलाके में उनकी तैनाती के समय उन्होंने उस क्षेत्र से एक लाख से अधिक तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तानी (अब बांग्लादेश) घुसपैठियों को वापस खदेड़ दिया था, लेकिन राजनीतिज्ञों के कारण उसके बाद वैसा इतिहास आज तक नहीं दोहराया गया और न दोहराया जाएगा।
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