कांग्रेस ने गुरुवार को साफ किया कि सेतुसमुद्रम परियोजना जबरन नहीं बनाई जाएगी और जरूरी हुआ तो इसके लिए नए सिरे से अध्ययन कराया जा सकता है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने यहाँ कहा कि इस परियोजना का मामला उच्चतम न्यायालय में है तथा उसने कुछ मुद्दे उठाए हैं।
यदि न्यायालय इस संबंध में कोई अध्ययन कराने का सुझाव देता है तो सरकार के सामने ऐसा करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा। सरकार को पूरे मामले में न्यायालय को अपने पक्ष से संतुष्ट करना होगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई है, मोइली ने कहा कि हम ऐसा कुछ नहीं कह रहे हैं। मीडिया अपना मतलब निकालने के लिए स्वतंत्र हैं।
उन्होंने परियोजना के निर्धारित समय पर पूरा होने के बारे में कुछ कहने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि परियोजना जबरन क्रियान्वित नहीं की जाएगी।
तटरक्षक बल द्वारा परियोजना को लेकर प्रश्न उठाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मसले को लेकर नए-नए मुद्दे उठ रहे हैं जिसे देखते हुए परियोजना पर व्यापक रूप से विचार करने की जरूरत पड़ सकती है।
तटरक्षक बल के महानिदेशक द्वारा इस परियोजना को सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक बताए जाने पर मोइली ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में स्पष्टीकरण पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडीस से माँगा जाना चाहिए, जिन्होंने जनवरी 1999 में इस परियोजना को तीन वर्ष में पूरा करने की घोषणा की थी।
मोइली ने कहा कि फर्नांडीस ने ऐसा करते समय रामसेतु का नहीं बल्कि एड्म ब्रिज शब्द का इस्तेमाल किया था। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार को रामसेतु मसले पर अपना रुख साफ करने के लिए आज चार सप्ताह का समय दिया।
न्यायालय ने सरकार से दो अलग-अलग हलफनामे पेश कर परियोजना के मार्ग और रामसेतु को प्रचीन स्मारक घोषित करने के संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा किए गए अध्ययन की जानकारी देने को कहा है।
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