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दूसरी पत्नी गुजारा भत्ता की हकदार
उच्चतम न्यायालय ने दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता दिए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज कर दी है।

न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है।

याचिकाकर्ता मनजीतसिंह चावला ने उच्च न्यायालय के 20 सितंबर, 2007 को निचली अदालत को दिए गए निर्देश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी।

उच्च न्यायालय के आदेश में निचली अदातल से कहा गया था कि वह इस सबंध में मनजीत की पत्नी नरिन्दर पाल कौर चावला द्वारा गुजारा भत्ता माँगे जाने के मामले की सुनवाई हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत याचिका के गुण-दोष के आधार पर करे। इस पर निचली अदालत ने नरिन्दर की याचिका यह कहते खारिज कर दी थी कि दूसरी पत्नी होने के नाते उसका विवाह अवैध है, इसलिए वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने निचली अदातल की इस फैसले को खारिज करते हुए मनजीतसिंह को आदेश दिया था कि उसे अपनी दूसरी पत्नी को प्रतिमाह 1500 रुपए गुजारा भत्ता देने के साथ उसे अपने घर के दूसरे तल पर रहने की जगह भी देनी होगी।

नरिन्दर और मनजीत का विवाह 11 दिसंबर, 1977 को सिख रीति-रिवाजों के मुताबिक जालंधर में हुआ था। विवाह के बाद दोनों दिल्ली की फिडेंस कालोनी में रहने आ गए।

कुछ दिनों बाद जब नरिन्दर को यह पता लगा कि उसका पति पहले से ही विवाहित है तो उसने मनजीत पर उसके साथ धोखे से विवाह करने का आरोप लगाते हुए अदालत में पति से गुजारा भत्ता के लिए मुकदमा दायर कर दिया।
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