मान इतना भी मुखर हो सकता है, इसका आभास राजपथ पर 59वें गणतंत्र दिवस पर हुआ, जब राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल के हाथों वीर जवानों की विधवाओं और उनके बूढ़े पिता ने अशोक चक्र ग्रहण किया और फ्रांस तथा यूरोप से आए पत्रकरों की आँखों से आँसू बरबस ही बह निकले।
राजपथ पर सलामी गारद तथा मनोरम झाँकियों को देखकर फ्रांस से आए इन पत्रकारों के मुँह से बार-बार निकला- इट्स वंडटरफुल।
फ्रांस के ली मांडे अखबार के वरिष्ठ पत्रकार रिडेट फिलिप ने कहा कि मैं कई देशों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने गया हूँ, लेकिन भारत के इस गणतंत्र दिवस समारोह में मुझे अलग ही अनुभूति हुई है। अन्य देशों में ऐसे मौकों को महज शक्ति प्रदर्शन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत में गणतंत्र दिवस अपने आप में काफी अलग है। यहाँ सैन्य शक्ति के प्रदर्शन से लेकर ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक अनेकता में एकता की झलक अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है।
गणतंत्र दिवस देखने आई ली मांडे अखबार की पत्रकार 58 वर्षीय मारिया एले इतनी भावविभोर हो गईं कि उनकी आँखों से आँसू ही निकल आए।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते वीरगति को प्राप्त हुए कर्नल बसंत वेणुगोपाल की पत्नी सुभाषिणी बसंत जब अपने पति को मिला अशोक चक्र ग्रहण करने आईं तो मारिया की आँखें बरबस बह उठीं।
गणतंत्र दिवस पर रेडियो फ्रांस के पत्रकार सिमोन एलेस्ट बान ने कहा कि यह अपने आप में मन को काफी छूने वाला अनुभव है।
उन्होंने कहा कि भारत का यह गणतंत्र दिवस उनके लिए इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी इसमें मुख्य अतिथि हैं।
उन्होंने कहा राष्ट्रपति सरकोजी के साथ उनकी प्रेमिका ब्रूनी के आने की उन्हें कोई नई जानकारी नहीं है लेकिन वह आती तो काफी अच्छा होता।
राजपथ पर चटख सलामी देते सधे कदमों से सुरों की होली पर आगे बढ़ते कदमों को देख फ्रांस तथा यूरोप से आए लगभग 60 पत्रकारों के दल के मुँह से बार-बार बस यही निकल रहा था- इट्स हैपेन्स ओनली इन इंडिया।
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