राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल और उनके पारिवारिक सदस्यों की बुधवार से शुरू अंडमान-निकोबार द्वीप की तीन दिवसीय यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए सैकड़ों पेड़ों को बलि चढ़ा दिया गया।
पोर्ट ब्लेयर, हेवलॉक और वांडुर में राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के लिए हेलीपेड बनाने में 400 से ज्यादा पेड़ काट दिए गए। पोर्ट ब्लेयर में विमानतल से राज निवास के बीच कम से 60 पेड़ इसलिए बलि चढ़ गए, क्योंकि ये जहाँ राष्ट्रपति ठहरेंगी, वहाँ से बीच का नजारा देखने में बाधा खड़ी करते।
हेवलॉक में हेलीपेड है, लेकिन वहाँ सुरक्षा कारणों से पेड़ों को काटा गया। इसके अलावा हेलीपेड से वांडुर गाँव तक राह बनाने के लिए पेड़ काटे गए।
प्रवक्ता का वक्तव्य : राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने नई दिल्ली में बताया कि राष्ट्रपति भवन ने हेलीपेड बनाते समय पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाने के लिए कहा था।
अंडमान प्रशासन के अनुसार कोई पेड़ नहीं काटा गया, लेकिन हेलिकॉप्टर को सुरक्षित उतारने व उड़ान के लिए कुछ पेड़ों की शाखाएँ काटी गई हैं।
अंडमान के मुख्य वन संरक्षक व पर्यावरण सचिव एसएस चौधरी ने कहा कि पेड़ हेलीपेड बनाने के लिए काटे गए। हेलिकॉप्टर को उतारने और उड़ाने में बाधक पेड़ों को हटाना जरूरी था।
अंडमान वायुसेना ने हेलीपेड प्रोजेक्ट पर निगरानी की और इसे अंडमान के लोक निर्माण विभाग ने क्रियान्वित किया।
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