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बिना पर्स के खरीद लाओ बाजार!
यहाँ रहने वाली एनआरआई सीमा शर्मा बुधवार को अपने साथ पर्स लाना भूल गई और ट्यूब (परिवहन साधन) में जाने के लिए स्टेशन पहुँच गई। स्टेशन पर उसे पर्स का ध्यान आया। हालाँकि उसके पास उसका मोबाइल था।

तभी ऑफिस का एक व्यक्ति एकांत त्रिपाठी भी वहाँ पहुँच गया। उसने मोबाइल से सीमा और उसकी खुद की टिकट ली और ऑफिस से वापसी में भी उसे घर तक छोड़ गया। इस दौरान दोनों ने समाचार पत्र खरीदे।

डिपार्टमेंटल स्टोर से कॉफी खरीदी और कुछ छिटपुट खरीदारी भी की। सारा भुगतान मोबाइल के जरिए हो गया।

दरअसल बुधवार से लंदन में यह परीक्षण शुरू हो गया है। रेल का टिकट लेना हो या समाचार पत्र, नकद देने के बजाय मोबाइल फोन हिला भर दो काम हो जाएगा। इस ट्रायल को सफल माना जा रहा है।

सैकड़ों लोग इस सुविधा को लेने को तैयार बैठे हैं और उन्होंने ऐसे मोबाइल हैंडसेट ले भी लिए हैं। इस तरह के मोबाइल में क्रेडिट कार्ड है, साथ ही ओएस्टर कार्ड भी है।

दरअसल यह एक ऐसा उपकरण है, जिसका प्रयोग ट्रेन और बस में टिकट खरीदने के लिए किया जा सकेगा। यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और यह सुविधा जल्द ही अन्य स्थानों पर भी शुरू होगी।

कैसे होता है काम : इस तरह के मोबाइल को स्टेशन और दुकानों में स्कैनर में से निकाला जाता है। इसमें से पैसे काट लिए जाते हैं और खरीदार का भी काम हो जाता है और विक्रेता का भी। लोग करीब 10 पौंड तक का खर्च एक बार में कर सकते हैं। इसमें चुनी हुई दुकानों से खरीदी कर सकते हैं। इनमें कैफे, कॉफी रिपब्लिक, थ्रेशर्स और पुस्तकें आदि शामिल हैं।


जापान में वायरलैस लेन-देन बहुत आम है। जापान में आम आदमी मोबाइल के जरिए बर्गर से लेकर ट्रेन टिकट तक का भुगतान करता है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि छः माह में भी लंदन में यह स्कीम सफल रहती है तो बड़े भुगतान भी इसके जरिए किए जा सकेंगे। इसके अलावा इसके नेटवर्क में और दुकानों, कंसर्ट को भी जोड़ेंगे। जो कंपनियाँ इस स्कीम से जु़ड़ी हैं, उनमें ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन, मोबाइल फोन कंपनी ओ-2, बर्कलेकार्ड, वीजा योरप और नोकिया शामिल हैं। (नईदुनिया)
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