तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक के अध्यक्ष एम. करुणानिधि ने उच्चतम न्यायालय द्वारा तमिलनाडु बंद पर लगाई गई रोक के आदेश पर आज अपने कड़े तेवर में नरमी लाते हुए कहा कि आदेश का पूरी तरह पालन किया गया है और इसकी अवहेलना का सवाल ही नहीं उठता।
इसके कुछ समय पहले ही उन्होंने न्यायालय के आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यदि न्यायालय का बस चले तो वह उनके उपवास पर रोक का भी आदेश पारित कर सकता है।
सेतु समुद्रम परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने की केन्द्र से माँग करते हुए द्रमुक ने सोमवार को एक अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था, जिसे विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
पत्रकारों के इस सवाल पर कि उच्चतम न्यायालय ने बंद पर रोक के उसके आदेश के उल्लंघन को न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में रखने की बात कही है, करुणानिधि ने कहा- हम न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
एक पत्रकार द्वारा न्यायालय की उस सख्त टिप्पणी पर कि उसके आदेश के बावजूद बंद की कोशिश करना एक तरह से राज्य में समूचे संवैधानिक तंत्र के चरमराने की स्थिति है, करुणानिधि ने कहा- आपको ऐसा लगता होगा। हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं, इसलिए न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
करुणानिधि ने आज आश्चर्यजनक रूप से अपना उपवास कुछ घंटे बाद ही खत्म करते हुए अन्ना द्रमुक की अध्यक्ष जयललिता पर बंद के मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय तक पहुँच जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा करके वे सेतु समुद्रम परियोजना में व्यवधान खड़ा कर रही हैं।
सुश्री जयललिता द्वारा न्यायालय के आदेश को एक बड़ी जीत करार दिए जाने पर उन्होंने कहा कि वे इससे कतई शर्मिंदा नहीं हैं, क्योंकि तमिलनाडु की जनता जानती है कि उन्होंने बंद का आह्वान सेतु समुद्रम परियोजना को शीघ्र पूरा कराने के लिए जनहित में ही किया था।
उन्होंने कहा कि अब लोगों को यह साफ हो गया है कि कौन परियोजना के खिलाफ है और कौन इसके हक में हैं, परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग चुने जाने के अन्नाद्रमुक और अन्य विपक्षी राजनीतिक दलों के बयान पर उन्होंने कहा कि ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं सुश्री जयललिता सच्चाई अनभिज्ञ हैं, क्योंकि वैज्ञानिक या आर्थिक किसी भी नजरिये से परियोजना के वैकल्पिक मार्ग सही नहीं होंगे।
बंद के खिलाफ न्यायालय के आदेश और द्रमुक द्वारा इसके अनुपालन के बावजूद राज्य में आज ज्यादातर स्थानों पर दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान और शिक्षण संस्थाएँ बंद रहीं। सड़कों पर बहुत कम वाहन चले, लिहाजा बैंकों और केन्द्र तथा राज्य सरकार के कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति नहीं के बराबर रही।
रेल सेवाएँ सामान्य रहीं, लेकिन घरेलू उड़ानों पर असर पड़ा। कोयंबटूर में झड़प की छिटपुट घटना को छोड़कर पूरे राज्य में आमतौर पर शांति बनी रही।
कांग्रेस अनशन से दूर : सेतु समुद्रम परियोजना को तेजी से अमल में लाने की माँग को लेकर द्रमुक के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव एलायंस (डीपीए) के 10 घंटे के अनशन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया।
द्रमुक की स्थानीय इकाई के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री आरवी जानकीरमन ने अनशन का नेतृत्व किया। भाकपा की पुडुचेरी इकाई के सचिव एन. कल्याणनाथन ने अनशन में कांग्रेस के नहीं भाग लेने की आलोचना की।
|