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देश ने की मंथर गति से प्रगति
आजादी के इन साठ वर्षों में साक्षरता, स्वास्थ्य, स्त्री-पुरुष अनुपात और शहरी विकास जैसे मानव विकास के मानको में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन इसकी गति काफी धीमी रही है और अभी इस दिशा में और प्रयास किए जाने की जरूरत है।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार 1951 में भारत की साक्षरता दर 18.33 फीसदी थी। उस समय पुरुष साक्षरता दर 27.16 फीसदी, जबकि महिला साक्षरता दर 8.86 फीसदी थी।

वर्ष 2001 में देश की साक्षरता दर 64.84 फीसदी हो गई। इसमें पुरुष साक्षरता दर 75.26 फीसदी, जबकि महिला साक्षरता दर 53.67 फीसदी है। 1951 से 2001 तक में जहाँ महिला साक्षरता दर में करीब छह गुना वृद्धि हुई, वहीं पुरुष साक्षरता दर तीन गुना रफ्तार से बढ़ी।

आजादी के इन साठ वर्षों में स्त्री-पुरुष साक्षरता दर में काफी सुधार हुआ, लेकिन पुरुष और स्त्री साक्षरता दर में अब भी करीब 20 फीसदी का अंतर है। देश की करीब 35 फीसदी आबादी अब भी निरक्षर है।
राज्य स्तर पर अगर साक्षरता दर को देखें तो 2001 में सर्वाधिक साक्षर राज्य केरल की साक्षरता दर 90.86 फीसदी थी, जबकि सबसे कम साक्षरता दर वाले राज्य में यह महज 47 फीसदी थी। इस प्रकार सर्वाधिक साक्षर और सबसे कम साक्षर राज्य के बीच अब भी करीब 43 फीसदी का अंतर है।

किसी राष्ट्र अथवा उपक्षेत्र की स्वास्थ्य स्थिति के आकलन के लिए उस स्थान के शिशु मृत्युदर को जानना कारगर कदम होता है। ऐसा किसी खास वर्ष में पैदा हुए प्रति एक हजार बच्चों का अध्ययन करके प्राप्त किया जा सकता है।

वर्ष 1946- 51 के दौरान भारत में शिशु मृत्युदर 134 प्रति हजार थी, जो सन 2002 में घटकर 63 प्रति हजार हो गई। यह विश्व में अब भी सर्वाधिक है। शिशु मृत्युदर को जीवित शिशुओं की सापेक्ष दर में भी देखा जा सकता है। वर्ष 1951 में यह बालक-बालिकाओं के लिए क्रमश: 32.45 और 31.66 थी। वर्ष 1999-2001 में यह बढ़कर बालकों के लिए 61.3 तथा बालिकाओं के लिए 63 हो गई।

आजादी के बाद से अपरिपक्व उम्र की मृत्युदर में भी गिरावट देखी गई है। वर्ष 1951 में यह प्रति एक हजार पर 25 थी, जो 2002 में घटकर 8.1 तक पहुँच गई।

स्त्री-पुरुष लिंगानुपात में आजादी के बाद से काफी गिरावट आई है। वर्ष 1951 में यह प्रति एक हजार पुरुषों पर 946 थी, जो 2001 में घटकर 933 हो गई। हालाँकि 2001 में 1991 की तुलना में लिंगानुपात में वृद्धि हुई। वर्ष 1991 में लिंगानुपात प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या मात्र 926 थी। आजादी के बाद इससे पहले सिर्फ एक मौके पर लिंगानुपात में वृद्धि देखी गई। वर्ष 1971 में लिंगानुपात 930 था, जो 1981 में बढ़कर 934 हो गया।

भारत में शहरीकरण की रफ्तार में भी स्वतंत्रता के उपरांत वृद्धि हुई है। जहाँ 1951 में कुल जनसंख्या का 82.7 फीसदी लोग गाँवों में तथा 17.3 फीसदी लोग शहरों में रहते थे, वहीं 2001 में यह क्रमश: 72.2 तथा 27.8 फीसदी हो गया। वर्ष 2001 में पूरे देश में फैले 5161 शहरों में 28.6 करोड़ लोग रहते थे, जबकि 1951 में मात्र 6.2 करोड़ लोग शहरों में रहते थे।
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