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सरकार को झेलना होंगे अपनों के भी वार
हंगामेदार होगा संसद का मानसून सत्र
देश के राष्ट्रपति के चुनाव के बाद दस अगस्त से होने वाले संसद के मानसून सत्र में इस बार भारत-अमेरिका के बीच हुए 123 परमाणु समझौते पर संप्रग सरकार को विपक्ष के साथ-साथ अपनों (वामदलों) की घेराबंदी को भी तोड़ने में काफी मशक्कत करना पड़ेगी।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यानी दस अगस्त को उपराष्ट्रपति का चुनाव भी है, जो राज्यसभा का सभापति भी होता है। उस दिन पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को दोनों सदनों में श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित हो जाएगी।

हालाँकि मनमोहनसिंह ने विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी की अनुपस्थिति में आगामी 13 अगस्त को इस समझौते पर स्वयं अपनी ओर से संसद में बयान देना स्वीकार कर लिया है, पर विपक्षी राजग और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के तीखे प्रहार पर आशंका व्यक्त करते हैं कि वे सरकार की घेराबंदी करने से बाज नहीं आएँगे।

संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने बताया है कि मुखर्जी के विदेश यात्रा से लौटते पर 20 अगस्त के बाद विस्तृत चर्चा हो सकती है, पर अभी तक इस मुद्दे पर लोकसभा में नियम-184 के तहत चर्चा कराने को कोई नोटिस नहीं मिला है।

प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने इस समझौते को लेकर कड़ी आपत्तियाँ और आशंकाएँ व्यक्त की हैं। उसका कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले इस पर संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए और संसद की मंजूरी ली जानी चाहिए, क्योंकि अधिकांश सांसद उसके खिलाफ हैं।

विपक्षी राजग ने गोवा मामले को भी संसद में जोर-शोर से उठाने की घोषणा की है। उसका कहना है कि जिस प्रकार वहाँ विधानसभा अध्यक्ष प्रतापसिंह राणे ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दो और कांग्रेस की एक विद्रोही विधायक को मतदान करने से वंचित किया, वह असंवैधानिक और लोकतंत्र की सरेआम हत्या है। उसने स्पष्ट कहा है कि जब तक राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता मनोहर पार्रीकर के नेतृत्व वाले गोवा डेमोक्रेटिक अलायंस को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाता, तब तक वह संसद में और बाहर अपना विरोध जारी रखेगा।

विपक्ष इस सत्र में प्रधानमंत्री के उस बयान को लेकर भी सरकार को घेरेगा, जिसमें उन्होंने नियंत्रण रेखा को शांति सीमा रेखा में बदलने को कहा था। विपक्ष का कहना है कि खासतौर पर पाकिस्तान से आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा ‍दिया जा रहा है, फिर ऐसा कैसे यह संभव है। उसने सरकार पर आतंकवादियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है।


उत्तरप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के अनेक भागों में बाढ़ की विनाशलीला भी इस सत्र में बहस का मुद्दा बनेगी। विपक्ष का आरोप है कि केन्द्र सरकार राहत कार्यों के नाम पर कुछ नहीं कर रही है।

वामदल 123 परमाणु समझौते के साथ ही असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के मुद्दे पर सरकार को घेरेंगे। सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों के लिए यह उनकी विचारधारा और विश्वसनीयता की परीक्षा होगी।

बहुचर्चित महिला आरक्षण विधेयक के इस मानसून सत्र में आने की उम्मीद नहीं है, पर गैर सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण संबंधी विधेयक इसी सत्र में पेश किया जाएगा।

सरकार ने विवादास्पद प्रसारण विधेयक इसी मानसून सत्र में ही संसद में पेश करने के गंभीर प्रयास करने का आश्वासन दिया है। सत्र के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (संशोधन) विधेयक-2007 समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश और पारित किए जाएँगे। इसी तरह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) विधेयक-2007 भी पेश और पारित कराया जाएगा। ये दोनों विधेयक संबंधित अध्यादेशों का स्थान लेंगे। चालू वित्तवर्ष की अनुपूरक माँगें तथा रेलवे की अनुपूरक माँगें भी पारित की जाएँगी।

संसद में पहले से पेश 25 विधेयक की इस सत्र में चर्चा और पारित करने के ‍लिए आएँगे, जबकि निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं नियमन) विधेयक 1995 समेत तीन विधेयक वापस लिए जाएँगे।

स्वतंत्रता के 60वें वर्ष के उपलक्ष्य में 14 अगस्त की रात संसद की विशेष बैठक बुलाने की संभावना के बारे में दासमुंशी ने कहा इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करेंगे, क्योंकि इस बारे में दो मत हैं। एक मत यह है कि संसद की ऐसी विशेष बैठक 25वें तथा 50वें वर्ष में हुई है और अब 75वें वर्ष में होनी चाहिए, जबकि दूसरा मत 60वें वर्ष में भी ऐसा करने के पक्ष में है।
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