देश में दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को समय की आवश्यकता बताते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा है कि यह प्रणाली उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जो किन्ही कारणों से महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों में पढ़ने नहीं जा सके। राष्ट्रपति ने रविवार को मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं अकादमिक भवनों का लोकार्पण करने के बाद एक समारोह में कहा कि ऐसे लोग जो महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों में पढ़ने नहीं जा सके अथवा किन्हीं कारणों से जिन्हें बीच में ही शिक्षा छोड़ना पड़ी है, विश्वविद्यालयों को खुद चलकर उनके घर तक पहुँचना चाहिए चाहिए और ऐसी व्यवस्था दूरस्थ शिक्षा प्रणाली में ही है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को शिक्षित कर देश की विकास प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है। देश को अगर विकास के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाना है तो महिलाओं को शिक्षित करना जरूरी है। दूरस्थ शिक्षा प्रणाली में एड्यूसेट की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रणाली में संचार प्रौद्यौगिकी, इलेक्ट्रॉनिक आदि विषयों को शामिल किया जा चुका है और इस सैटेलाइट के जरिये दोतरफा वीडियो एवं रेडियो के कारण आपसी संवाद भी संभव हो गया है। देश के विशाल ग्रामीण अंचलों के लिए ऐसी शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रतिभा पाटिल ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली ने ऐसी प्रतिभावान मानव पूँजी का निर्माण किया है जो विभिन्न क्षमताओं, विभिन्न क्षेत्रों और राष्ट्रीय जीवन के सभी स्तरों पर क्रियाशील रही है, जबकि इस दौरान हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था और सूचना प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में अग्रणी देश के रूप में उभर कर आए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समाज की उपयोगी इकाई बनने तथा अपने भीतर की क्षमताएँ पहचान कर विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं से भी कहा कि वे ऐसे नागरिक तैयार करें जो संवेदनशील एवं नागरिक दायित्वों के प्रति निष्ठावान हों।
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