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जाति से जंग में जान दी  Search similar articles
समाज से बहिष्कृत संगीता छोड़ गई कई सवाल
मुँहबोले भाई का अंतरजातीय विवाह कराने के कारण बंजारा समाज से बहिष्कृत कर दी गई संगीता सिंह ने मंगलवार सुबह आत्महत्या कर ली। इस गम में दोपहर बाद भाई रंजन ने भी जहर खाकर जान दे दी। शर्मनाक बात यह है कि दोनों ने जान देने से एक दिन पहले ही कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय में आत्महत्या की लिखित सूचना दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

चाँदबड़ निवासी संगीता के परिवार को बंजारा समाज पंचायत ने 1 जून को समाज से बेदखल कर दिया था। संगीता अकेले समाज के निर्णय के खिलाफ लड़ रही थी, लेकिन प्रताड़ना, सामाजिक दबाव और कहीं से भी सहयोग न मिलने से परेशान होकर उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। पुलिस के अनुसार दोपहर 1 बजे उसकी मौत हो गई।

इस बात की सूचना अस्पताल पहँुचे उसके मुँहबोले भाई रंजन को लगी तो वह बिना किसी को कुछ बताए सीधा चिनार पार्क पहुँचा। यहाँ उसने भी जहर खा लिया। पुलिस ने उसे इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल पहँुचाया, लेकिन बहन की मौत के चंद घंटों बाद उसने भी दम तोड़ दिया।

छोटा-सा जीवन बड़ी दास्ताँ : यह 36 वर्षीय संगीता उर्फ विजया के छोटे से जीवन की बड़ी दास्ताँ है। माँ की मौत के बाद ब्राह्मण परिवार में पली संगीता उस परिवार के विकलांग बेटे रंजन पांडे को सगे भाई से ज्यादा मान और प्यार देती थी। माँ की मृत्यु के बाद करीब 15 साल तक संगीता ने ही रंजन की परवरिश की। उसने करीब सालभर पहले रंजन की शादी बंजारा समाज की ही एक विकलांग लड़की रुचि से करवा दी

इस विवाह से खफा बंजारा समाज ने 1 जून को पंचायत बुलाकर संगीता और उसके पति परसराम सिंह को समाज से बेदखल करने का फरमान जारी कर दिया। पंचायत ने यह भी आदेश दिया कि जब तक हर्जाने के रूप में परसराम सिंह 5100 रुपए अदा नहीं करते, उन्हें समाज में वापस नहीं लिया जाएगा।

उन्हें पूरे समाज के लिए शराब के साथ मांसाहारी भोज आयोजित करने को भी कहा गया। अपनी दो बेटियों की शादी की चिंता लिए संगीता ने पंचायत के इस फरमान के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।

मरते दम तक लड़ती रही : समाज की जिस पंचायत के आगे पुरुष भी जुबान खोलने से डरते हैं, संगीता ने उसकी ज्यादती के खिलाफ अकेले विरोध का झंडा उठाया। आठवीं तक पढ़ी संगीता ने न केवल पंचायत के सामने अपने तर्क रखे, बल्कि उसका आदेश मानने से इंकार भी कर दिया था।

पंचायत में उसके पति और भाई खामोश रहे। उधर हर लड़ाई लड़ने को तैयार संगीता किसी भी सूरत में विकलांग भाई-भाभी का साथ छोड़ने को राजी नहीं थी। पंचायत के फैसले के बाद उसने कहा था कि वह अन्याय के आगे नहीं झुकेगी और मरते दम तक अपनी जंग जारी रखेगी।

प्रताड़ना बढ़ी और कहीं से साथ नहीं मिला तो संगीता ने मंगलवार को अपनी बात सच कर दिखाई। जिस भाई के लिए वह लड़ रही थी वह भाई भी संगीता की मौत का सदमा नहीं सह सका और उसने भी जान दे दी।

मुख्यमंत्री से राहत दिलाएँगे : मप्र राज्य चैतन्य बंजारा संघ के अध्यक्ष नारायणसिंह बंजारा ने कहा कि संगीता की मौत की सूचना दुःखद है। उसके बच्चों के लिए मुख्यमंत्री से राहत दिलाने की कोशिश करूँगा। (नईदुनिया)
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