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PIB
प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने ऐतिहासिक भारत-अमेरिका परमाणु करार को जबरदस्त समर्थन देने को लेकर सोमवार को अमेरिकी सांसदों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक अहम ‘मील का पत्थर’ बताया।

सिंह ने सांसदों के एक दल से मुलाकात की और और उनके साथ कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री की यात्रा के दूसरे दिन यहाँ उनसे मुलाकात करने वालों में कांग्रेस सदस्य स्टेंट होयर, क्रिस वैन होलेन, हावर्ड बर्मन, गैरी एकरमैन, ब्रैड शेरमैन, एडवर्ड मार्के, एड रूइस और जिम मैक डेरमॉट के नाम शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वर्तमान में विवरणों को अंतिम रूप दे रहे हैं जिससे करार पूरी तरह कार्यान्वित हो जाएगा। एक बार यह हो जाए तो इससे परमाणु और अन्य क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के प्रवाह पर बंदिशें हट जाएँगी। इससे अमेरिकी कारोबार के लिए व्यावसायिक अवसरों का एक वृहद क्षेत्र खुल जाएगा। भारत और अमेरिका ने 2008 में ऐतिहासिक असैन्य करार पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन समझौते का कार्यान्वयन तीन लंबित मुद्दों के चलते रुका हुआ है।

ये लंबित मुद्दे हैं भारत का अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा मानकों के तहत समर्पित पुनर्प्रसंस्करण सुविधा की स्थापना, भारत का दायित्व संबंधी विधेयक को कानून बनाना और अप्रसार का आश्वासन देना।

पुनर्प्रसंस्करण सुविधा के बारे में दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं और वे जितना जल्द संभव हो सके उसे निष्कर्ष तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

दायित्व संबंधी विधेयक और अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय के लिए जरूरी अप्रसार आश्वासन को कैबिनेट मंजूरी दे चुका है। इस अप्रसार आश्वासन के जरिये ही अमेरिकी ऊर्जा मंत्रालय अनुच्छेद 810 के तहत अपने देश की कंपनियों को भारत के साथ असैन्य परमाणु कारोबार करने की अनुमति देगा।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती के संदर्भ में सिंह ने कहा कि भारत इस समस्या से जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के जरिये घरेलू स्तर पर निपट रहा है। यह योजना उर्जा प्रभाव क्षमता और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में कई नई पहल को रेखांकित करती है।

उन्होंने कहा कि ये वे क्षेत्र हैं जिनमें आपकी कंपनियाँ नेतृत्व करती हैं और हमें सहयोग के संभावित क्षेत्र तलाशने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी अमेरिकी सरकार के साथ कल ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ उर्जा तथा जलवायु परिवर्तन पर करारनामा (एमओयू) करने की योजना है। इससे विशिष्ट क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग पूरा करने के लिए रूपरेखा मुहैया हो सकेगी।

सिंह ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ रक्षा उपकरणों की खरीद की संभावना सहित रक्षा सहयोग के क्षेत्र को विस्तार दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे घरेलू निजी क्षेत्र के रक्षा आपूर्तिकर्ताओं को अब 26 फीसदी तक विदेशी निवेश की इजाजत है, जिससे भारत-अमेरिका सहयोग के लिए एक नई राह खुलेगी। (भाषा)
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