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प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को जारी रखने का भरोसा दिलाते हुए ढाँचागत क्षेत्र, ऊर्जा और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का न्योता दिया।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और देश दो वर्षों में फिर से 9 फीसद की तीव्र आर्थिक वृद्धि की राह पर लौटेगा।

अमेरिका यात्रा पर चार दिन की यात्रा पर आए प्रधानमंत्री ने अपने पहले महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अमेरिका और भारत के कंपनी जगत के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार की योजना करों, शिक्षा, कौशल विकास और कानूनी क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की है। दोपहर भोज पर आयोजित इस बैठक का आयोजन यूएस-इंडिया बिजनेस एंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के तत्वावधान में किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भी मैं व्यवसायियों से मिलकर भविष्य के लिए योजनाओं पर बातचीत करता हूँ अकसर मुझसे पूछा जाता है कि क्या आर्थिक सुधार जारी रहेगा। आपको इस मोर्चे पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले के आर्थिक सुधारों से हमें लाभ हुआ है और मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ कि हम इस रास्ते पर आगे बढ़ना जारी रखेंगे। हम इस पर थोड़ा धीमे चल सकते हैं जिससे बदलाव के लिए एक व्यापक सहमति बन सके, लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि हम हार मानने वाले नहीं हैं।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि अन्य उभरते देशों की तरह भारत भी वैश्विक आर्थिक संकट से प्रभावित हुआ है और इसकी वृद्धि दर मंद पड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि दर घटकर 2008-09 में 6.7 फीसद रह गई और चालू वित्तीय वर्ष में यह 6.5 फीसद रहेगी।

उन्होंने कहा कि हालाँकि हमें इसके और ऊँचा होने की उम्मीद है और दो वर्ष के भीतर हम फिर से 9 फीसद की वृद्धि दर की राह पर लौट आएँगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख सुधार प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही ढाँचागत क्षेत्र में भारी निवेश आकर्षित करने की भी पहल की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भारत में कर प्रणालियों में सुधार, विशेषकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू करना सरकार के एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी तरह वित्तीय क्षेत्र में सुधारों के लिए भी सरकार कदम उठा रही है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने विभिन्न जीएसटी पर परिचर्चा पत्र जारी कर दिया है। जीएसटी केन्द्र और राज्य स्तरों के ज्यादातर अप्रत्यक्ष करों का स्थान ले लेगा। सिंह ने कहा कि हम शिक्षा एवं कौशल विकास में व्यापक सुधार के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। हमने सार्वजनिक क्षेत्र हिस्सेदारी बेचकर संसाधन जुटाने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया है।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा कि औद्योगिक देशों में धीमी आर्थिक वृद्धि दर के चलते भारत का निर्यात घटा है । इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक बचत और निवेश की दर, मानव संसाधन एवं सशक्त निजी क्षेत्र के बल पर तेज वृद्धि दर की पटरी पर लौटेगी। उन्होंने कहा कि हमारी घरेलू बचत दर काफी तेजी से बढ़ी है और 2007-08 में इससे 39 फीसद की निवेश दर हासिल करने में मदद मिली। इस निवेश में ज्यादातर हिस्सा निजी निवेश का रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रमिक का कौशल, वैज्ञानिक प्रतिभा और प्रबंधन क्षमता के मामले में हमारे पास पर्याप्त मानव संसाधन है। उन्होंने कहा कि 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट से पहले पाँच वर्षों तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर औसतन 9 फीसद रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को सबसे तेजी से उभरते बाजार वाली अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा जाने लगा है। यह विदेशी निवेश के लिए आकषर्क स्थल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर बड़ी अमेरिकी कंपनियाँ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक के तौर पर मौजूद हैं। कई कंपनियाँ उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रही हैं और भारत में उनका कारोबार उनकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है। (भाषा)
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