भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘बेहद महत्वपूर्ण’ बताते हुए ओबामा प्रशासन ने कहा कि वह इन दोनों देशों के साथ गहन संवाद कर रहा है। अमेरिका ने यह बात ऐसे समय में कही है जब चीन-अमेरिका संयुक्त बयान में भारत-पाक संबंधों के जिक्र से भारत नाखुश है।
अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता राबर्ट वुड ने कहा कि भारत और चीन दो उभरती शक्तियाँ हैं। दुनिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वुड ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और चीन के साथ अमेरिका करीबी सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि ये देश महत्वपूर्ण हैं और दोनों के साथ हमारे संबंध बढ़ रहे हैं।
वुड के इस बयान से ठीक दो दिन पहले भारत ने चीन-अमेरिका संयुक्त बयान में भारत-पाक संबंधों के जिक्र पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जो राष्ट्रपति ओबामा की चीन यात्रा के दौरान जारी किया गया था। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका उसे मंजूर नहीं है।
संयुक्त बयान पर अपनी टिप्पणी में भारत के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि किसी तीसरे देश की भूमिका की कल्पना भी नहीं की जा सकती और इसकी जरूरत भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि ओबामा और उनके चीनी समकक्ष हू जिन्ताओ ने भारत-पाक संबंधों में सुधार और क्षेत्र में शांति एवं स्थायित्व के लिए मदद देने के लिए स्वर में स्वर मिलाया था।
भारत और चीन के साथ अमेरिका के गहन संवाद का जिक्र करते हुए वुड ने कहा कि मुझे लगता है कि दोनों देश भी भारत-चीन संबंधों के महत्व को समझते हैं और संबंधों को बेहतर बनाने की ओर बढ़ना न केवल क्षेत्रीय स्थायित्व के लिए बल्कि दुनिया की स्थिरता के लिए भी जरूरी है।
बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को जगह दिए जाने पर वुड ने कोई टिप्पणी करने से परहेज किया, जिसमें चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस स्थायी सदस्य हैं। एक सवाल पर वुड ने कहा कि चीन के साथ अमेरिका की अपनी चिंताएं हैं जिसे उसने चीनी अधिकारियों के समक्ष रखा है।
उन्होंने कहा कि जब भी उचित लगा, बातचीत के हर स्तर पर हमने अपनी चिंताएँ जाहिर की हैं। आशा करते हैं कि चीन उस दिशा में आगे बढ़ेगा जिस दिशा में हम उसे आगे बढ़ता देखना चाहते हैं। मानवाधिकारों के मुद्दे पर चीन और अमेरिका की राय अक्सर अलग-अलग रही है और अमेरिका ने इस बाबत अपनी चिंता से चीनी अधिकारियों को अवगत कराया है। (भाषा)