मुंबई आतंकवादी हमलों की पहली बरसी से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा है कि उन्हें हर दिन खुफिया रिपोर्ट मिल रही है। इनसे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन मुंबई की तर्ज पर भारत पर और हमलों की योजना बना रहे हैं।
PTI
आतंकवाद को राजकीय नीति के रूप में इस्तेमाल करने के पाकिस्तान के कदम को ‘दुःखद’ बताते हुए सिंह ने कहा है कि भारत इस शर्त के साथ उसके साथ लंबित सभी मुद्दों के निपटारे के लिए तैयार है कि वह अपने पड़ोसी के खिलाफ आतंकवादियों गतिविधियों के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं करने देगा।
अमेरिका यात्रा से पहले वॉशिंगटन पोस्ट के साथ साक्षात्कार में सिंह ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतकंवाद से भारत पीड़ित रहा है। खुफिया रिपोर्ट अब भी संकेत देती हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन बीते साल मुंबई हमलों के जैसे हमले दोबारा करने की योजना बना रहे हैं।
भारत से न डरे पाकिस्तान : सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को भारत से ‘डरने की जरूरत नहीं हैं’ और यह ‘‘दुःखद’’ है कि ऐसी नौबत आ गई है कि राजकीय नीति के साधन के रूप में पाकिस्तान आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने कहा हम पाकिस्तान के साथ लंबित सभी मामलों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी एकमात्र शर्त यह है कि भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान को अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करने की आतंकवादियों को इजाजत नहीं देना चाहिए।
उन्होंने कहा पाकिस्तान यदि वाकई इस प्रतिबद्धता का सम्मान करता है तो हम बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं और अपने बीच लंबित सभी मुद्दों को सुलझा सकते हैं।
सिंह ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से भारत लगभग 25 वर्षों से पीड़ित रहा है। सिंह अगले मंगलवार वॉशिंगटन पहुँचेंगे और उसी दिन के वॉशिंगटन पोस्ट के रविवार के संस्करण में उनका यह साक्षात्कार प्रकाशित होगा। सिंह ने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका अपने तमाम प्रभावों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान से इस रास्ते को छोड़ने के लिए कहे।
मुंबई हमलों को लेकर पाक गंभीर नहीं : सिंह ने कहा-जहाँ तक मुंबई नरसंहार की साजिश रचने वालों का सवाल है, पाकिस्तान ने कुछ कदम उठाए हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं।
सिंह ने पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद पर भी चिंता जताई और कहा कि आतंकवादी पाकिस्तान के कई हिस्सों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जो भारत की सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
उन्होंने कहा अतीत में पाकिस्तान के फाटा क्षेत्र में सीमित रहे तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठन अब यदि पाकिस्तान की मुख्य भूमि पर आते हैं तो मुझे लगता है कि हमारी सुरक्षा पर इसका गंभीर असर पड़ता है। सिंह ने कहा-हम नहीं चाहेंगे कि आतंकवाद ऐसे हालात पैदा कर दें, जिसमें कोई असैन्य सरकार नाममात्र की सरकार रह जाए।
अमेरिका-पाकिस्तान के मंसूबे अलग : सिंह ने कहा कि अफगानिस्तान में अमेरिका और पाकिस्तान के मकसद में फर्क प्रतीत होते हैं और उन्हें नहीं लगता है कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान पूरी तरह से समर्पित है।
सिंह ने कहा जहाँ तक अफगानिस्तान का सवाल है, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अमेरिका और पाकिस्तान के मकसद एक समान हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहेगा कि अमेरिका अफगानिस्तान से जल्द चला जाए, वहीं अमेरिका का मकसद यह है कि पाकिस्तान तालिबान से निपटने पर अपना ध्यान केंद्रित करे।
उन्होंने कहा-बेशक पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन यह कार्रवाई तभी होती है जब सेना की सर्वोच्चता के लिए तालिबान खतरा बनता है।
अफगानिस्तान में अमेरिका और विश्व समुदाय की भागीदारी जारी रखने की आशा जताते हुए सिंह ने कहा कि तालिबान की जीत के दुनिया और खासतौर पर दक्षिण एशिया एवं पश्चिम एशिया के लिए अनर्थकारी नतीजे होंगे। (भाषा)