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मुख पृष्ठ » खबर-संसार » समाचार » अंतरराष्ट्रीय » जरदारी ने वरिष्ठ अधिवक्ता से मदद माँगी (Zardari seeks help from senior lawyer)
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विवादास्पद कानून को संभावित तौर निरस्त किए जाने के नतीजों से निबटने के लिए मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी के करीबी समझे जाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एतजाज अहसन से मदद माँगी है।

दरअसल जरदारी को भ्रष्टाचार के मामलों में इसी अध्यादेश के तहत माफी मिली थी।

पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने जरदारी और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अन्य नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को हटाने के लिए दो साल पहले एनआरओ जारी किया था।

वहीं इस अध्यादेश को 28 नवंबर तक संसद की मंजूरी नहीं मिलती है तो इसका प्रभाव खत्म हो जाएगा।

पीपीपी ने राजनीतिक दलों के दबाव पर हाल ही में एनआरओ को संसद में मंजूरी के लिए पेश करने की योजना को छोड़ दिया।

पीपीपी नीत सरकार इस मुद्दे पर संकट में फँसी हुई है जो न सिर्फ सत्तारूढ़ पार्टी के गले की हड्डी बनी हुई है, बल्कि उसे मुश्किल में भी डाल दिया है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि इस मुद्दे पर संसद के नाकाम रहने पर अब पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट को अब एनआरओ के जीवनकाल का फैसला करना है।

इस हालात में जरदारी का अहसन से संपर्क साधना एक अहम घटना मानी जा रही है क्योंकि इस वकील को इस साल की शुरूआत में पीपीपी की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति से निलंबित कर दिया गया था।

पार्टी की खुले आम आलोचना करने और मुशर्रफ द्वारा अपने पदों से हटाए गए न्यायाधीशों की बहाली को लेकर वकीलों के आंदोलन का समर्थन करने को लेकर उन्हें निलंबित किया गया था।

पिछले कुछ महीनों से पीपीपी द्वारा दरकिनार किए गए अहसन ने पिछले कुछ दिनों में जरदारी और गिलानी से मुलाकात की है।

पीपीपी के लोगों का मानना है कि अहसन ही एकमात्र शख्स हैं जो चौधरी को प्रभावित कर इस संकट से उबरने में सरकार और जरदारी की मदद कर सकते हैं।

खबरों के मुताबिक अहसन को पंजाब सूबे के अटार्नी जनरल के पद की भी पेशकश की गई है।

सूत्रों ने पीटीआई को बताया‘जरदारी ने बृहस्पतिवार को अहसन के साथ की गई अपनी बैठक के दौरान एनआरओ पर कानूनी दावपेंच के बारे में चर्चा की और उनसे कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश से कहे कि वह सरकार के लिए संकट नहीं खड़ा करें।’(भाषा)
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