सैन्य अड्डे पर हमले का संदिग्ध कोमा में

सुरक्षा कारणों से दूसरी जगह भेजा गया
ह्यूस्टन , शनिवार, 7 नवंबर 2009( 16:39 IST )
गोलीबारी कर 13 सैनिकों की हत्या करने का संदिग्ध अमेरिकी सेना का मनोचिकित्सक मेजर निदाल मलिक हसन कोमा में है और सुरक्षा कारणों से उसे असैन्य से सैन्य अस्पताल में भेज दिया गया है।
हसन की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जाती है उसे कृत्रिम श्वसन प्रणाली पर रखा गया है। उधर, गोलीबारी की चपेट में आए लोग अब भी अस्पतालों में मौत से जूझ रहे हैं। हत्याओं के पीछे के मकसद का पता लगाने के प्रयास में लगे जाँचकर्ता हसन के कोमा के कारण परेशान हैं।
सेना के एक अधिकारी ने कहा कि 13 लोगों की हत्याओं के मामले में संदिग्ध को सुरक्षा कारणों से असैन्य से सेना के अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है।
अब तक जाँचकर्ता उन सभी कारणों का खुलासा करने में लगे हैं, जिस कारण हत्यारे ने अमेरिकी सैन्य अड्डे में अब तक का सबसे भीषण हत्याकांड अंजाम दिया।
वे पूछताछ करने में तो विफल रहे हैं लेकिन जाँचकर्ताओं ने टेक्सास में किलीन स्थित उसके घर की तलाशी के दौरान हसन का कंप्यूटर जब्त किया है। हत्या का मकसद का पता लगाने के लिए उन्होंने संदिग्ध के कूड़े में भी खोजबीन की है। इस भयंकर खून खराबे में एक महिला पुलिस अधिकारी ने हसन पर चार बार गोलियाँ दागी जिससे वह कोमा में चला गया।
अस्पताल सूत्रों ने कहा कि उसे लगे कुछ जख्म बहुत गंभीर हैं और वह शायद बच नहीं सकता। इसी आशंका के कारण जाँचकर्ता पूछताछ के लिए इतने बेचैन हैं।
अधिकारियों को यह सवाल सर्वाधिक परेशान कर रहा है कि क्या उन्होंने चेतावनी के संकेत नजरअंदाज कर दिए। हमले के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। लेकिन खबरों से संकेत मिलता है कि अभिभावकों के मना करने के बावजूद हाई स्कूल के बाद सेना में शामिल हुआ हसन परेशान था।
उसके एक संबंधी ने बताया कि अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले के बाद से हसन कई बार शिकायत कर चुका था कि उसके सहयोगी उसकी मजहबी पृष्ठभूमि को लेकर उसे परेशान करते हैं।
बताया जाता है कि वह ज्यादातर अकेला रहता था। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी कार्रवाइयों पर भी उसने कड़ी आपत्ति जताई थी। प्रत्यक्ष तौर पर वह अफगानिस्तान में अपनी तैनाती नहीं चाहता था।
बताया जाता है कि हसन का वॉशिंगटन स्थित वाल्टर रीड आर्मी मेडिकल सेंटर में काउंसेलर के पद पर काम करते समय प्रदर्शन अच्छा नहीं था। पिछले साल उसे मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया था।
न्यूयॉर्क स्थित फोर्डहैम यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर बेरी रोजेनफेल्ड ने बताया कि अगर चेतावनी के संकेत थे, तो इसका मतलब यह नहीं है कि घटना को रोकना आसान था।
उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोई इस हद तक जा सकता है कि उसके लिए कहा जाए कि वह बिखरने लगा है।’’ रोजेनफेल्ड ने कहा कि हसन को कभी युद्ध क्षेत्र में तैनात नहीं किया गया था और उसे युद्ध के बाद के सदमे और तनाव का अनुभव नहीं है। लेकिन सैनिकों का मनोचिकित्सक भी इस कदर तनावग्रस्त हो सकता है।
हसन की, उत्तरी वर्जीनिया में रह रही एक संबंधी नादेर हसन ने बताया ‘‘हमारा परिवार कल के हादसे के पीड़ितों के दुख को समझ सकता है। जो कुछ भी हुआ, वह जायज नहीं था। हम सभी पूछ रहे हैं कि ऐसा क्यों हुआ .. इसका जवाब हमें मालूम नहीं है। घटना से पहले हसन ने जो कुछ किया, उसे लेकर लोग भ्रमित हैं। उसने घर से निकलने से पहले उसकी पूरी सफाई की, एक पड़ोसी को ब्रोकोली दी और दूसरे पड़ोसी को उसकी मित्रता के लिए धन्यवाद कहा। अक्सर सैनिक ऐसा करते हैं।
एक कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रॉबर्ट कोन ने बताया सैनिकों का कहना है कि हमलावर ने ‘‘अल्लाहो अकबर’’ का नारा लगाया था और फिर गोलीबारी शुरू की थी। लेकिन उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने अब तक पुष्टि नहीं की है कि हसन ने ऐसा कहा था।
इस बीच, एक अरब अमेरिकी संस्थान ने घटना पर अफसोस जताया है। संस्थान ने बयान में कहा है कि हजारों अरब अमेरिकी और अमेरिकी मुसलमान अमेरिकी सेना, नेशनल गार्ड की हमारी चार शाखाओं मे हर दिन पूरे सम्मान के साथ काम करते हैं। इनमें वे जवान भी शामिल हैं जो अफगानिस्तान और इराक में तैनात हैं। (भाषा)