अरुणाचल प्रदेश पर अपने सुर नरम करते हुए चीन की सरकारी मीडिया ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की अपने भारतीय समकक्ष मनमोहनसिंह के साथ हुई हालिया बैठक एक ‘सुहानी बयार’ के समान थी, जिसके कारण द्विपक्षीय संबंधों में आए संदेह और गलतफहमी के बादल छँट गए।
अरुणाचल प्रदेश के बारे में चीन के विरोध के बीच थाईलैंड में आसियान सम्मेलन से इतर सिंह और वेन के बीच हुई 24 अक्तूबर की बैठक का चीन की सत्तारूढ़ सीपीसी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेली’ ने पहली बार सकारात्मक मूल्यांकन किया है।
मुखपत्र के संपादकीय में कहा गया कि दोनों प्रधानमंत्रियों में इस बात को लेकर आमराय बनी कि इन दोनों पड़ोसी देशों को एक रणनीतिक साझेदारी तैयार करनी चाहिए।
संपादकीय में कहा गया कि चीनी प्रधानमंत्री और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच बनी आम राय एक सुहानी बयार की तरह है, जिसने पिछले एक दशक से भी अधिक समय से द्विपक्षीय संबंधों पर छाए संदेह और गलतफहमी के बादल को छाँट दिया है।
चीन की ओर से यह टिप्पणी हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच पैदा हुए तनाव के लिए दलाई लामा को जिम्मेदार ठहराने संबंधी बयान के सिर्फ दो दिन के बाद आई है।
पीपुल्स डेली’ के संपादकीय में कहा गया है कि वेन और मनमोहन के बीच इस बात पर सहमति बनी कि क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व को कायम रखने के लिए दोनों देशों को एक रणनीतिक साझेदारी तैयार करनी चाहिए, जिससे साझा विकास और सौहार्दपूर्ण समृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
संपादकीय में कहा गया है कि चीन और भारत के बीच संबंधों में पिछले दशकों में उतार-चढ़ाव आने के बावजूद प्रगति हुई है। इसमें इस बात को पर जोर दिया गया है कि दोनों देश के नेता इस बात पर सहमत हुए कि चीन और भारत एक-दूसरे को कभी भी खतरे के तौर पर नहीं देखेंगे।
इसमें सीमा मुद्दे के बारे में कहा गया है कि दोनों पक्ष वार्ता के जरिये अपने मतभेदों को कम करने और इसका हल निकालने की बात पर राजी हुए, जिसमें दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाए।
संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों की ओर से सीमाई इलाकों में शांति सुनिश्चित करने और एक दोस्ताना माहौल तैयार करने जरूरत है। साथ ही कई रूप में सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि अक्टूबर में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा और इस राज्य में दलाई लामा की प्रस्तावित यात्रा को लेकर हाल ही में भारत और चीन के बीच वाकयुद्ध चला। इस राज्य के कुछ हिस्सों पर चीन दावा करता रहा है। चीन ने इन दोनों लोगों की यात्रा पर आपत्ति जताई, लेकिन भारत ने बीजिंग की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया।
संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों की मीडिया को एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए और लोगों की राय को प्रोत्साहित करने के लिए एक स्वस्थ माहौल बनाना चाहिए।