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छह महीने की अवधि में दूसरी बार भारत स्थित सूचना प्रौद्योगिकी कारोबार के गढ़ का नाम लेते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी स्कूल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी मानक विकसित करें ताकि उनके विद्यार्थी ‘बीजिंग और बेंगलूर के लोगों से’टक्कर ले सकें।

शिक्षा का स्तर उँचा करने के लिए चार अरब अमेरिकी डॉलर की संघीय शैक्षणिक मदद की घोषणा करते हुए ओबामा ने कहा कि अमेरिका की खुशहाली लंबे समय से इस पर निर्भर रही है कि किस तरह यहाँ के बच्चों को शिक्षित किया जाता है।

ओबामा ने कहा‘मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि अब 48 राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगी मानक विकसित कर रहे हैं क्योंकि इन युवाओं को अंतरराष्ट्रीय परिवेश में विकसित होना होगा जहाँ रोजगार के लिए उनका मुकाबला न सिर्फ शिकागो या लॉस एंजिलिस के बच्चों से है, बल्कि बीजिंग और बेंगलूर के लोगों से भी उनकी प्रतिस्पर्धा है।’

वह विस्कोन्सिन के मैडीसन में एक माध्यमिक स्कूल के छात्रों के लिए ‘रेस टू टॉप’ कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे जब उन्होंने चार अरब डॉलर की संघीय शैक्षणिक मदद देने की घोषणा की।

इस वर्ष गत मई में भी ओबामा ने कहा था ‘बेंगलूर को ना कहें और बफेलो सिटी को हाँ कहें'। ‘बफेलो सिटी’ से उनका अर्थ न्यूयॉर्क जैसे अमेरिकी शहरों से था।

व्हाइट हाउस में कर सुधारों का खुलासा करने के क्रम में एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए उन्होंने मौजूदा अमेरिकी प्रणाली की आलोचना की थी और कहा था कि ‘अगर आप बेंगलूर में रोजगार के अवसर निर्मित करें तो यह व्यवस्था कम कर लेती है और अगर रोजगार न्यूयॉर्क के बफेलो में हो तो आपको ज्यादा कर अदा करना होता है’।

उन्होंने कहा कि 21 वीं सदी में जो देश शिक्षा के क्षेत्र में हमसे आगे बढ़ते जा रहे हैं, आने वाले कल में वे हमें प्रतिस्पर्धा से बाहर कर देंगे। ऐसे में हमें हमारे बच्चों को आज दी जा रही शिक्षा से बेहतर शिक्षा मुहैया करानी होगी। इससे अधिक महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है।

किसी देश का नाम लिए बिना ओबामा ने कहा कि अमेरिका ने हमेशा नवोन्मेषी राह का नेतृत्व किया है लेकिन अब वह गणित तथा विज्ञान की शिक्षा में पिछड़ता जा रहा है।

उन्होंने कहा‘स्नातक और आगे की पढ़ाई की डिग्रियों में कई कालेजों में हम अग्रणी रहते आए हैं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।’ओबामा ने राज्यों से शिक्षा के स्तर में सुधार करने के लिए कहा ताकि उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।(भाषा)
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