जीव-जंतुओं के विलुप्त होने का खतरा

दुनिया की एक तिहाई प्रजातियों पर संकट-सर्वेक्षण
लंदन (भाषा), मंगलवार, 3 नवंबर 2009( 21:53 IST )
अतंरराष्ट्रीय जैव विविधता के एक अध्ययन में कहा गया है कि विश्व में जीव-जंतुओं की 47677 प्रजातियों में से एक तिहाई से अधिक प्रजातियों (17291 प्रजातियाँ) पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की विलुप्त होने की कगार पर खड़ी प्रजातियों की हालिया ‘खतरे की सूची’ के मुताबिक स्तनधारी जीव-जंतु की 21 फीसदी प्रजातियाँ, उभयचर जीवों की 30 फीसदी प्रजातियाँ और पक्षियों की 12 फीसदी प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है।
वनस्पतियों की 70 फीसदी प्रजातियों के अलावा ताजे पानी में रहने वाले सरीसृप की 37 फीसदी प्रजातियाँ, अकशेरूकी (मेरुदंड रहित जंतु) की 35 फीसदी प्रजातियों पर भी विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
आईयूसीएन के एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को आईयूसीएन के जैव विविधता संरक्षण समूह के निदेशक जेन स्मार्ट के हवाले से बताया गया है कि जंतुओं के विलुप्त होने के गंभीर खतरे का वैज्ञानिक सबूत बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जनवरी में जैवविविधता का अंतरराष्ट्रीय वर्ष शुरू होगा। आईयूसीएन की ‘रेड लिस्ट’ के हालिया विश्लेषण में बताया गया है कि जैवविविधता में हो रही गिरावट में कमी लाने का 2010 का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।
स्मार्ट ने चेतावनी दी कि सरकारों के लिए जीव-जंतुओं को बचाने के प्रति गंभीर होने का समय आ गया है। आईयूसीएन की सूची के मुताबिक विश्व के 5490 स्तनधारी जंतुओं की प्रजातियों में से 79 तो विलुप्त हो गए हैं, जबकि 188 विलुप्त होने के कगार पर हैं।
आज की तारीख में उभयचर विलुप्ति के खतरे का सबसे अधिक सामना करने वाला जीव है। इसकी 6285 प्रजातियों में से 1895 प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर है। इसकी 39 प्रजातियाँ तो विलुप्त भी हो चुकी हैं।
इस सूची में 1677 सरीसृप प्रजातियाँ हैं, इनमें से 469 प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं, जबकि इनकी 22 प्रजातियाँ भी हो गई हैं। वनस्पतियों की 12151 प्रजातियों में से 8500 प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही है, जबकि इनकी 114 प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी हैं।