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राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के लिए सोमवार को एक नई नई मुसीबत पैदा हो गई, जब उनके एक सहयोगी एमक्यूएम ने उनसे उस विवादास्पद कानून पर पद त्याग करने को कहा है, जिसके जरिये उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को रद्द कर उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हुआ था। उधर, पीएमएलएन नेता नवाज शरीफ ने कानून को अदालत में चुनौती देने की धमकी दी है।

तेजी से बदलते घटनाक्रम वाले दिन में लंदन में बसे एमक्यूएम के प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने कहा कि जरदारी को पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रणाली को बचाने के लिए बड़ा बलिदान देने को तैयार रहना चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश का अनुमोदन करने के लिए संसद की कार्यवाही शुरू होने से कुछ घंटे पहले आई। इस अध्यादेश को पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने जारी किया था ताकि पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और जरदारी को भ्रष्टाचार के मामले में मुक्ति दी जा सके।

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अनवर ने बताया कि हुसैन ने सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के एक मंत्री के जरिये जरदारी को संदेश भेजा था। उन्होंने सलाह दी थी कि उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए त्यागपत्र दे देना चाहिए।

अनवर ने कहा कि अगर जरदारी ने तेजी से कदम नहीं उठाया तो लोकतंत्र के पटरी से उतर जाने का खतरा है। अनवर ने कहा कि अगर वे वस्तुस्थिति को समझ सकते हैं तो उन्हें समझना चाहिए कि वे काफी दबाव में हैं। एमक्यूएम का मानना है कि संसद में एनआरओ का समर्थन करना भ्रष्टाचार को वैधता प्रदान करना होगा।

हुसैन की राय सार्वजनिक होने के कुछ ही समय बाद पीएमएलएन प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि अगर एनआरओ को संसद में मंजूरी दी गई तो वे इसे अदालत में चुनौती देंगे।
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