शुक्रवार की दोपहर में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओमामा को वर्ष 2009 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई। इस घोषणा के बाद ही यह विवाद शुरु हो गया है कि क्या वाकई ओबामा इस पुरस्कार के हकदार हैं?
2009 के शांति नोबेल पुरस्कार के लिए 200 उम्मीदवार थे लेकिन समिति ने क्या ओबामा को सिर्फ इसलिए चुना कि वे दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्र के प्रथम नागरिक हैं?
जानकारों का कहना है कि ओबामा को पुरस्कार मिलना किसी चुटकुले से कम नहीं है क्योंकि वे एक ऐसे देश के राष्ट्रपति हैं जो कि अफगानिस्तान में युद्ध कर रहा है। फिर भी उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया जबकि दुनिया में शांति स्थापना के क्षेत्र में उनका योगदान नहीं के बराबर है।
'द टेलीग्राफ' समाचार पत्र के मुख्य राजनैतिक टिप्पणीकार बैनेडिक्ट ब्रोगेन ने तो यहाँ तक कह दिया कि ओबामा को शांति का नोबेल पुरस्कार वापस कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोबेल समिति का फैसला स्तब्ध करने वाला है।
कार्डिफ से एक सज्जन रिचर्ड ने बीबीसी को लिखा कि एक ऐसे राष्ट्रपति को नोबेल पुरस्कार दिया जाना आश्चर्यजनक है, जो युद्ध कर रहा है। लंदन के जॉन ब्लेक ने लिखा है कि यह तो साफ एक मजाक है।
क्या आप भी यह समझते हैं कि ओबामा को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाना, पुरस्कार की गरिमा को गिराता है तो खुलकर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।