सेंट पीटर्सबर्ग (विशेष प्रतिनिधि), मंगलवार, 8 सितंबर 2009( 23:58 IST )
ND
जवाहरलाल नेहरू ने 1957 में जो बीज बोया था वह आज लहलहाते वृक्ष के रूप में भारत-रूस दोस्ती के पथिकों को घनी छाँव और सुकून दे रहा है। इस छायादार पेड़ को अपनी उपस्थिति, गर्मजोशी और संकल्प से सींचा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने।
राष्ट्रपति शनिवार की शाम सेंट पीटर्सबर्ग के स्कूल क्रमांक 653 के विद्यार्थियों से मिलीं। इस स्कूल की स्थापना 1957 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने भारत-रूस मैत्री को और प्रगाढ़ करने तथा रूस में हिन्दी और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी।
राष्ट्रपति पाटिल महात्मा गाँधी और पंडित नेहरू के मूल्यों और नीतियों की सच्ची संवाहक हैं। वैसे तो यह बात उनकी पूरी रूस यात्रा के दौरान प्रमुखता से उभरकर सामने आई पर स्कूल क्रमांक 653 के कार्यक्रम से यह बात और गहराई से रेखांकित हुई।
यहाँ के एस्टोरिया होटल में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने न केवल भारत-रूस मैत्री को गढ़ने में पंडित नेहरू के योगदान को याद किया बल्कि महात्मा गाँधी के उद्धरणों का भी प्रमुखता से उपयोग किया।
उन्होंने यह भी कहा, भारत में तो कहा जाता है कि 'बच्चे मन के सच्चे, सारे जग की आँख के तारे' और यही बच्चे आगे जाकर हमारी मैत्री को आगे बढ़ाएँगे। राष्ट्रपति ने इस स्कूल के लिए हिन्दी सॉफ्टवेयर, प्रोजेक्टर और कम्प्यूटर उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की। श्रीमती पाटिल ने इससे पहले मास्को में भी दूतावास के माध्यम से चलाए जा रहे इंडियन स्कूल के लिए बस और 25 कम्प्यूटर देने की घोषणा की।
प्रभावी सांस्कृतिक प्रस्तुति : स्कूली बच्चों ने राष्ट्रपति के समक्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावी प्रस्तुति दी। इसमें शामिल सभी बच्चे रूसी थे लेकिन जिस उत्क़ृष्टता से उन्होंने हिन्दी गाना गाया और भारतीय लोक-नृत्य और शास्त्रीय नृत्य पेश किए, उससे लगा ही नहीं कि हम यह कार्यक्रम रूस में देख रहे हैं।
सबसे पहले बच्चों ने 'एक तू ही सहारा, एक तू ही भरोसा, हे ईश्वर या अल्लाह हमें प्यार दे' गाया। इसके बाद उन्होंने राजस्थानी लोक नृत्य की प्रभावी प्रस्तुति दी। भगवान शिव की आराधना करते हुए प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य में एक साथ ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुडी और कथकली को शामिल किया गया।
होली-दिवाली भी मनाते हैं : सेंट पीटर्सबर्ग के इस स्कूल में सभी भारतीय त्योहार खासतौर पर होली और दिवाली बहुत उत्साह से मनाई जाती है।
चित्रकारी प्रतियोगिता : रूस में भारत उत्सव के अंतर्गत भारतीय दूतावास द्वारा इस स्कूल में एक चित्रकारी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। 'रूस की दृष्टि में भारत' विषय पर रूसी बच्चों ने खूबसूरत चित्र बनाए। इसमें वरवोरा स्तेरहोवा द्वारा बनाए गए चित्र द मार्निंग ताजमहल को पहला पुरस्कार दिया गया। विजेताओं को श्रीमती पाटिल ने पुरस्कृत किया।
खूबसूरत शहर है दिल्ली : इस स्कूल के बच्चे हिन्दी सीखते हैं। उन्हें कैसी हिन्दी आती है यह जानने के लिए दसवीं कक्षा की छात्रा रीटा से जब हिन्दी में कुछ बोलने को कहा तो वह मुस्कराकर बोली - दिल्ली एक बहुत खूबसूरत शहर है। बाद में तो उसने शाहरुख खान और ऐश्वर्या से लेकर 'स्लमडॉग मिलिनेयर' के बारे में भी बात की।