एक नई वैज्ञानिक समीक्षा में खुलासा हुआ है कि पृथ्वी का उष्णकटिबंधीय क्षेत्र बदल रहा है और संभवत: इसके चलते चक्रवात और बीमारियाँ बढ़ रही हैं तथा बारिश के रुझान में भी बदलाव आ रहे हैं।
‘जेम्स कुक यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाला एक अंतरराष्ट्रीय दल 70 शोधपत्रों और दुनियाभर के वैज्ञानिकों तथा संस्थानों की ओर से आई रिपोर्टें देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचा।
शोधकर्ताओं ने पाया कि उप उष्णकटिबंधीय इलाकों की सीमा से सटे क्षेत्र चिंता के विषय हैं। इस दल के प्रमुख प्रोफेसर स्टीव टर्टन ने कहा कि इन क्षेत्रों में दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप, भूमध्यसागरीय पश्चिम एशियाई क्षेत्र, दक्षिण पश्चिमी अमेरिका, उत्तरी मैक्सिको और दक्षिणी दक्षिण अमेरिका शामिल हैं। अनुमान है कि इन सभी क्षेत्रों में गंभीर सूखा पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अगर शुष्क उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का विस्तार इन क्षेत्रों में होता है तो जल संसाधनों, प्राकृतिक, पर्यावरणीय व्यवस्था और कृषि के लिए इसके नतीजे विनाशकारी होंगे। आशंका है कि सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य मामलों पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार समीक्षा सुझाती है कि इन क्षेत्रों में ज्यादा सूखा पड़ेगा, जबकि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विस्तार के नतीजतन अत्यधिक बारिश और बाढ़ भी आएगी। आने वाले 100 वर्ष में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में भी ध्रुवीय बदलाव देखने को मिलेंगे।
प्रोफेसर टर्टन ने कहा कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में विस्तार के अधिक परिणाम ये होंगे कि इससे जुड़ी बीमारियाँ तथा महामारियाँ बढ़ने की आशंका में भी इजाफा होगा।
आमतौर पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र को ज्यामितीय भाषा में पृथ्वी की सतह का वह भाग कहा जाता है जो कर्क रेखा और मकर रेखा क्षेत्र के बीच क्रमश: उत्तर और दक्षिण में 23 दशमलव पाँच डिग्री अक्षांश पर स्थित है।
समीक्षा में कहा गया कि बहरहाल, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का विस्तार होने और जलवायु संबंधी अन्य परिवर्तन होने के सबूत हैं, लेकिन विस्तार कितना होगा इस बारे में अब भी काफी अनिश्चिताएँ हैं।
समीक्षा कहती है कि उदाहरण के लिए अध्ययनों में यह अनुमान लगाया गया है कि हर 25 वर्ष में उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का विस्तार दो से पाँच डिग्री अक्षांश तक हो सकता है। इससे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का न्यूनतम विस्तार करीब 300 किलोमीटर तक होने के अनुमान पर सहमति है। |